जम्मू विश्वविद्यालय ने जम्मूयित, साहित्य संस्कृति संगम का नाम बदल कर अब जम्मू विश्वविद्यालय, साहित्य संस्कृति संगम कर दिया गया है। जम्मू क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को जम्मूयित शब्द के माध्यम से प्रस्तुत करने की कोशिश पर छात्रों, शोधार्थियों और नागरिक समाज के बीच गंभीर चिंताएं और आपत्तियां सामने आई थीं।

इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रधान अरुण प्रभात ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और इस शब्दावली को विभाजनकारी बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से कार्यक्रम के शीर्षक को बदलने की मांग की। अपने संबोधन में उन्होंने प्रशासन को आगाह किया था कि यदि इस पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए कार्यक्रम का नाम बदल दिया। पहले इस कार्यक्रम का शीर्षक जम्मूियत, साहित्य संस्कृति संगम रखा गया था, जिसे अब बदलकर जम्मू विश्वविद्यालय, साहित्य संस्कृति संगम कर दिया गया है।

जम्मू क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को लेकर उठे सवाल

अरुण प्रभात ने इस फैसले का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा सर्कुलर पर पुनर्विचार कर उसे संशोधित करना छात्रों, नागरिक समाज और अन्य संबंधित लोगों की चिंताओं को सुनने और उनका सम्मान करने की सकारात्मक पहल है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय तब फलते-फूलते हैं जब निर्णय-प्रक्रिया में संवाद, समावेशिता और आपसी सम्मान को प्राथमिकता दी जाती है। सर्कुलर को वापस लेकर कार्यक्रम का नाम बदलना इस बात का संकेत है कि विश्वविद्यालय प्रशासन एक स्वस्थ शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

बताते चलें कि आज पत्रकार वार्ता में वीसी प्रो. उमेश राय से भी इस कार्यक्रम के नाम को लेकर सवाल पूछे गए जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि हम जम्मू संभाग की मिली जुली संस्कृति की बात कर रहे हैं। उस समय तो वीसी ने नाम बदलने की बात नहीं कही लेकिन शाम को नाम बदल दिया गया।