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खाड़ी में युद्ध का विस्तार: ईरान के हमले और इजरायल की जवाबी कार्रवाई से बढ़ा वैश्विक तनाव

तीसरे सप्ताह में और खतरनाक हुआ संघर्ष

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ यह संघर्ष अब खाड़ी क्षेत्र के कई देशों तक फैल गया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने कुवैत, तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात के कई ठिकानों पर हमले किए, जबकि इजरायल ने पश्चिमी ईरान और इस्फहान क्षेत्र को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई कार्रवाई की।

खाड़ी देशों में हमलों से बढ़ी चिंता

रविवार को ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दीं। कुवैत और तुर्किए में कुछ सैन्य ठिकानों के आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गईं। वहीं यूएई के फुजैराह तेल टर्मिनल पर ड्रोन हमले के बाद आग लगने की घटना सामने आई।

हालांकि इन हमलों के बावजूद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हुईं। भारतीय ध्वज वाला तेल पोत ‘जग लाडकी’ करीब 80,800 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से भारत के लिए रवाना हो गया। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत तैनात किए गए हैं।

सऊदी अरब का गंभीर आरोप

इस बीच सऊदी अरब ने दावा किया कि ईरान ने उसके नागरिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए कम से कम 10 ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि ईरान ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है।

ईरान का कहना है कि उसके ‘शाहेद कामिकेज’ ड्रोन की नकल कर अमेरिका और इजरायल क्षेत्र में फाल्स-फ्लैग ऑपरेशन चला रहे हैं ताकि क्षेत्रीय देशों को ईरान के खिलाफ खड़ा किया जा सके।

इस्फहान पर इजरायल की बड़ी कार्रवाई

दूसरी ओर इजरायल ने ईरान के पश्चिमी क्षेत्रों और इस्फहान में कई सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इजरायली सेना ने दावा किया कि इन हमलों में मिसाइल नेटवर्क, सैन्य कमांड संरचना और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में धमाकों के बाद कई जगहों से धुआं उठता दिखाई दिया। यह इलाका ईरान के औद्योगिक और रक्षा ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

होर्मुज जलमार्ग पर बढ़ी निगरानी

खाड़ी क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण सवाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उठ रहा है। यह जलमार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति के लिए अहम माना जाता है।

ईरान ने कहा है कि यह जलमार्ग अभी खुला है, लेकिन इसकी निगरानी ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कर रही है। गार्ड के कमांडर अलीरेजा तांगसीरी के अनुसार केवल अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों के जहाजों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

ईरान का प्रस्ताव और कूटनीतिक पहल

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश केवल अमेरिकी ठिकानों और हितों को निशाना बना रहा है। उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाई जा सकती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हमलों के लिए जिम्मेदार कौन है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब अमेरिका इस क्षेत्र से अपना सैन्य प्रभाव कम करे।

लेबनान मोर्चे पर भी तेज हुई कार्रवाई

इस संघर्ष का असर लेबनान में भी दिखाई दे रहा है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के कथित कमांड सेंटर और लॉन्च साइटों पर हमले किए हैं।

राजधानी बेरूत में कई जगह विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक लेबनान में अब तक 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो चुके हैं।

बढ़ता मानवीय संकट

ईरान में रेडक्रॉस के अनुसार अब तक लगभग 1300 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 425 महिलाएं और 202 बच्चे शामिल हैं।

इजरायल में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। तेल अवीव के आसपास कई ठिकानों पर नुकसान की खबरें हैं और अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

शरणार्थियों की बढ़ती संख्या

युद्ध के कारण ईरान से हजारों लोग पलायन कर रहे हैं। अब तक करीब 32 हजार लोग अफगानिस्तान और लगभग चार हजार लोग पाकिस्तान में शरण ले चुके हैं।

धार्मिक नेता पोप लियो 16वें ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने और युद्ध समाप्त करने की अपील की है।

वैश्विक असर की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव दुनिया के लिए एक बड़े भू-राजनीतिक संकट का संकेत दे रहा है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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