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IIT गुवाहाटी की टीम ने विकसित किए ऊर्जा-कुशल ईंट

IIT Guwahati team develops energy-efficient bricks

गुवाहाटी, असम | 27 अप्रैल 2024

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी की एक शोध टीम ने हाल ही में ऊर्जा-कुशल ईंटें विकसित की हैं, जो भवनों को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने में मदद करती हैं। इस तकनीकी नवाचार का उद्देश्य टिकाऊ निर्माण के क्षेत्र में सुधार लाना और पर्यावरण की सुरक्षा करना है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि ये ईंटें विशेष डिज़ाइन और सामग्री के संयोजन से बनी हैं, जो ग्रीष्मकालीन मौसम में तापमान को नियंत्रित करती हैं। इससे भवन के अंदर की ठंडक बनी रहती है, जिसके परिणामस्वरूप एयर कंडीशनिंग और अन्य ऊर्जा आधारित ठंडक प्रणालियों पर निर्भरता कम होती है। इस पहल से न केवल ऊर्जा की बचत होगी बल्कि पर्यावरण प्रदूषण भी घटेगा।

टीम के मुखिया प्रोफेसर आर. के. शर्मा ने कहा, “हमारे द्वारा विकसित ये ईंटें भवन निर्माण में ऊर्जा की बचत के साथ-साथ स्थिरता लाने का एक प्रभावी माध्यम हैं। पर्यावरणीय दृष्टिकोण से यह तकनीक काफी फायदेमंद सिद्ध होगी।”

उन्होंने आगे बताया कि इस तकनीक को स्थानीय और वैश्विक स्तर पर अपनाने के लिए कई परीक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया की जा रही है। शोध में इस्तेमाल की गई सामग्री सस्ती, उपलब्ध और पर्यावरण हितैषी हैं, जिससे यह नवाचार कम लागत में बड़े पैमाने पर उपयोगी हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत जैसे देशों में जहां गर्मी की तीव्रता उच्च होती है, वहां ऐसे ऊर्जा-कुशल ईंटों का विकास और उपयोग अत्यंत आवश्यक है। ईंट की यह नई तकनीक न केवल ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देगी बल्कि शहरों में तापमान वृद्धि को भी नियंत्रित कर सकती है।

इस खोज को किफायती, टिकाऊ और पर्यावरण-सहायता देने वाली सामग्रियों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भवनों के कूलिंग सिस्टमों पर होने वाले खर्चों में कमी आएगी और घरेलू तथा व्यावसायिक दोनों प्रकार के निर्माणों में स्थिरता बढ़ेगी।

सरकारी प्रतिनिधियों और निर्माण उद्योग के विशेषज्ञ भी इस शोध के सकारात्मक प्रभावों को लेकर उत्साहित हैं। उनका मानना है कि इससे भारत के पर्यावरण संरक्षण और हरित निर्माण पहल में नया दिग्दर्शक मिलेगा।

इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा कुशल निर्माण सामग्री के क्षेत्र में IIT गुवाहाटी ने एक मील का पत्थर स्थापित किया है। आने वाले समय में इसके व्यावसायिक प्रयोग और भी व्यापक हो सकते हैं, जिससे सतत विकास की दिशा में ठोस प्रगति होगी।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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