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सीबीएसई योजना 2026-27: कक्षा 6 से तीन-भाषा सूत्र लागू; कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान के दो स्तर

CBSE plan for 2026-27: Three-language formula from Class 6; two levels of maths, science for Class 9

गणित और विज्ञान में दो स्तर की व्यवस्था के साथ 2026-27 से बड़ा बदलाव

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से गणित और विज्ञान विषयों में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन की घोषणा की है। इस नए बदलाव के तहत कक्षा 9 से दोनों विषयों के लिए दो स्तर की व्यवस्था लागू की जाएगी, जो विद्यार्थियों की क्षमताओं और रुचियों के अनुसार उन्हें विकल्प प्रदान करेगी।

सीबीएसई के अधिकारियों ने बताया कि यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षिक अनुभव को बेहतर और अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्यों से प्रेरित है। इससे छात्र अपनी समझ और कौशल के आधार पर गणित और विज्ञान में स्व-निर्धारित स्तर चुन सकेंगे। यह कदम पहली बार बोर्ड परीक्षा तक संरचित कर परीक्षा प्रणाली को अधिक लचीलापन देने के लिए उठाया गया है।

मूल रूप से, दो स्तरीय मॉडल में एक आधारभूत स्तर तथा एक उन्नत स्तर होगा। आधारभूत स्तर उन छात्रों के लिए होगा जो विषयों की बुनियाद मजबूत करना चाहते हैं, वहीं उन्नत स्तर उन विद्यार्थियों के लिए होगा जो विषयों में गहराई से ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं या विज्ञान एवं गणित आधारित करियर की तैयारी कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिवर्तन विद्यार्थियों के लिए फायदे मंद रहेगा क्योंकि इससे वे अपने व्यक्तिगत स्तर और लक्ष्य के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर पाएंगे। इससे उच्च शिक्षा एवं कैरियर विकल्पों में विविधता और सुधार की गुंजाइश बढ़ेगी।

सीबीएसई अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस नई संरचना के तहत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे विभिन्न स्तरों के छात्रों को बेहतर ढंग से मार्गदर्शन कर सकें। इसके अलावा, इस योजना के साथ तीन-भाषा सूत्र को भी कक्षा 6 से लागू किया जाएगा, जिससे भाषा कौशल भी बेहतर होंगे।

पिछले वर्षों में शिक्षा प्रणाली में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और वर्तमान पहल भी इसी क्रम का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के शिक्षा जगत में आधुनिक और अधिक प्रभावी पाठ्यक्रम प्रदान करने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।

कक्षा 9 से गणित और विज्ञान के दो स्तरों की शुरूआत के साथ ही शिक्षा को और अधिक व्यक्तिगत, रुचिपूर्ण और परिणामोन्मुखी बनाने की उम्मीद की जा रही है। इससे विद्यार्थी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रमों का चयन कर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

अंततः, यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को विश्व के समकक्ष बनाने और विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में बेहतर सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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