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भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा के पुनः विचार

Reimagining Engineering pedagogy in India

नई दिल्ली: आज के छात्र अमूर्त अवधारणाओं को समझने में सक्षम हैं, लेकिन वे वास्तविक दुनिया में डिजाइन करने, निर्माण करने या समस्याओं का समाधान करने में हिचकिचाते हैं। यह स्थिति इंजीनियरिंग शिक्षा के परंपरागत तरीकों पर एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा की पद्धति में बदलाव की जल्द आवश्यकता है ताकि छात्रों की प्रायोगिक क्षमता को बढ़ावा दिया जा सके।

भारतीय इंजीनियरिंग संस्थान और तकनीकी महाविद्यालयों में अभी भी ज्यों के त्यों कक्षा-केंद्रित और थ्योरी आधारित शिक्षा प्रणाली प्रचलित है। छात्रों को अधिकतर पुस्तक ज्ञान दिया जाता है और प्रयोगशाला कार्यों की मात्रा सीमित होती है। इस वजह से वे अपने ज्ञान को वास्तविक परियोजनाओं या समस्या समाधान में उतारने में असमर्थ रहते हैं।

शिक्षाविदों का कहना है कि आज के युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। छात्रों को प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण, इंटर्नशिप और उद्योग से जुड़े कार्यभार के माध्यम से व्यावहारिक अभि‍प्रेरणा मिलनी चाहिए। इससे वे जटिल इंजीनियरिंग समस्याओं का सामना करने में आत्मविश्वास विकसित कर सकेंगे।

उद्योग जगत भी लगातार उन इंजीनियरों की मांग कर रहा है जो डिजाइन, निर्माण और समस्याओं के समाधान में दक्ष हों। इस मांग को पूरा करने के लिए शिक्षण संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम में बदलाव करना अनिवार्य हो गया है। कुछ प्रमुख तकनीकी संस्थानों ने मॉडल परिवर्तन शुरू कर दिए हैं, जिसमें छात्रों को अपने विचारों को परियोजना के रूप में विकसित करने की आज़ादी मिलती है।

सरकार ने भी हाल ही में इंजीनियरिंग शिक्षा को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए कई नई योजनाएँ लागू की हैं। इनमें उद्योग–शिक्षा साझेदारी बढ़ाना, शोध एवं विकास को प्रोत्साहित करना और आधुनिक उपकरणों से लैस प्रयोगशालाओं की स्थापना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयास सफल होते हैं, तो भारत के इंजीनियरिंग छात्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से आगे बढ़ सकेंगे।

अंततः यह समझना आवश्यक है कि तकनीकी शिक्षा सिर्फ ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि नवाचार और समस्या समाधान का केंद्र है। इसलिए, इंजीनियरिंग छात्रों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से रूबरू कराना ही उनकी सफलता की कुंजी है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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