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मौसम की मार से आम उत्पादक प्रभावित, इस मौसम में केवल 10-20% फलन की उम्मीद

Mango farmers may take a blow as only 10-20% yield is estimated this season

देश के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में इस बार आम की फसल में भारी कमी देखने को मिल रही है, जिससे किसानों के समक्ष आर्थिक चुनौतियाँ बढ़ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में आम की उपज केवल 10 से 20 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश व आंध्र प्रदेश जैसे राज्य आम के उत्पादन में अग्रणी माने जाते हैं। इस बार इन क्षेत्रों में अनिश्चित मौसमी परिस्थितियों, जैसे कि अनियमित वर्षा, ठंडे मौसम का प्रभाव तथा कीट संक्रमण के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि उस निराशा का सामना करना पड़ रहा है जिसने उनके आर्थिक स्थिरता को गंभीरता से प्रभावित किया है।

एक किसान ने बताया, “पिछले साल की तुलना में इस बार आम का उत्पादन काफी कम रहा है। मौसम की अनियमितता और कीटों के प्रकोप के कारण लगभग 80 प्रतिशत फसल में नुकसान हुआ है। इससे परिवार की आजीविका पर सवाल उठ गया है।”

सरकारी कृषि विभाग ने भी फसल की स्थिति का जायजा लेते हुए कहा है कि वे प्रभावित किसानों के लिए राहत उपाय जल्द लागू करेंगे और उनसे संपर्क बनाए रखेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस स्थिति से उबरने के लिए किसानों को फसल बीमा और आधुनिक कृषि तकनीकों का सहारा लेना चाहिए।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि आम उत्पादक क्षेत्रों में सतत निगरानी के साथ-साथ कीट नियंत्रण और उचित सिंचाई व्यवस्थाओं को अपनाना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसे नुकसान को कम किया जा सके। इसके अलावा, मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार को भी आवश्यक कदम उठाने होंगे, जिससे किसान आत्मनिर्भर बने रहें।

इस वर्ष की कम उपज का असर बाजार मूल्य पर भी दिख सकता है, जिससे आम के दाम अधिक हो सकते हैं और उपभोक्ताओं को भी महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। किसानों, सरकारी अधिकारियों और वैज्ञानिकों के बीच समन्वय से ही इस संकट से बाहर निकलने की राह संभव है।

मौसम विज्ञान विभाग ने इस बात की चेतावनी भी दी है कि आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन से कृषि क्षेत्र पर और अधिक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए जरूरी है कि किसान नई तकनीकों को अपनाएं और सरकार स्थायी कृषि नीतियों का निर्माण करे।

आम उत्पादन में यह गिरावट न केवल किसानों के लिए बल्कि पूरे देश में फल बाजार और उपभोक्ताओं के लिए भी एक चिंता का विषय बन गई है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले मौसम में उपयुक्त प्रबंधन से इस स्थिति में सुधार होगा और आम की फसल फिर से सामान्य स्तर पर आएगी।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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