दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में गाए गीत: शब्दों की ट्रेनिंग ली, डायरेक्टर ने 25 हजार की मांग पर 7 हजार दिए और वे बनी रहीं चुप

आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

सिंगर आशा भोसले का शुक्रवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। भारतीय संगीत जगत की इस महान गायिका ने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि कई अन्य भाषाओं में गीत गाए। इनमें राजस्थानी भाषा भी शामिल है। उनके संगीत सफर में राजस्थानी फिल्मों के लिए उन्होंने 14 फिल्मों में कुल 45 गाने गाए और 8 से अधिक राजस्थानी भजनों को अपनी आवाज दी।

2019 में आशा भोसले जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भी उपस्थित थीं, जहां उन्होंने प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी के साथ अपनी मधुरतम यादें साझा कीं। राजस्थानी सिनेमा से जुड़ी अपनी यादों को साझा करते हुए राजस्थानी अभिनेता-निर्देशक क्षितिज कुमार ने बताया कि उनकी एक राजस्थानी फिल्म के लिए जब आशा जी को गाना गाने के लिए बुलाया गया तो मुंबई में उन्हें राजस्थानी भाषाई शब्दों की ट्रेनिंग दी गई थी। इस ट्रेनिंग के लिए उन्हें सात हजार रुपए दिए गए जबकि उनकी मांग 25 हजार रुपए थी, लेकिन आशा जी ने बिना कोई शिकायत किए सात हजार रुपए ही स्वीकार किए।

आशा भोसले के राजस्थानी फिल्मों में प्रवेश का श्रेय संगीतकार पंडित शिवराम को जाता है। उन्होंने 1961 में फिल्म ‘बाबासा री लाडली’ के लिए आशा जी से पांच राजस्थानी गीत गवाए। इनमें ‘ओ रंग रंगीलो आलीजो…’, ‘बोल पंछीड़ा रे…’, ‘सूती थी रंग म्हैल में…’ और महेंद्र कपूर के साथ गाया सुपरहिट डुएट ‘हिवड़ै सूं दूर मत जा…’ शामिल हैं। इसके बाद आशा जी ने ‘नानीबाई को मायरो’ फिल्म में अपनी आवाज दी, जहाँ उनके गाए गीत जैसे ‘म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो…’ और ‘म्हाने चूनड़ी ओढ़ाजा…’ काफी लोकप्रिय हुए।

राजस्थानी फिल्म विशेषज्ञ एमडी सोनी के अनुसार आशा भोसले ने ‘धणी लुगाई’, ‘गणगौर’, ‘गोपीचंद भरथरी’ और ‘ढोला मरवण’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी से चार चांद लगाए। राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर में संगीतकार नारायण दत्त ने फिल्म ‘म्हारी प्यारी चनणा’ (1983) के आठों गीत आशा जी से गवाकर एक नयी उम्मीद जगाई। इनमें ‘सावण आयो रे…’, ‘चांदड़लो चढ़ आयो गिगनार…’ और ‘झिरमिर झिरमिर रे…’ जैसे गीत वर्षों तक श्रोताओं के दिलों में बसे रहे।

आशा भोसले ने राजस्थानी सिनेमा को कभी भी सिर्फ एक क्षेत्रीय या रीजनल इंडस्ट्री के तौर पर नहीं देखा। वे हमेशा गुणवत्तापूर्ण गीतों में जुड़ना चाहती थीं, चाहे भाषा कोई भी हो। उन्होंने कुल 14 राजस्थानी फिल्मों में लगभग 45 गाने गाए। इसके अतिरिक्त वे राजस्थानी भजनों के लिए भी प्रसिद्ध रहीं, जिनमें वर्ष 1981 में रिलीज़ ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ एलपी रिकॉर्ड शामिल है, जो गीतकार भरत व्यास के लिखे भजनों का संग्रह था।

क्षितिज कुमार ने बताया कि 1996 में आई उनकी फिल्म ‘राधू की लक्ष्मी’ के गीत ‘रात ढलती जाए’ को आशा भोसले ने गाया था। आरडी बर्मन के निधन के बाद वे इस गाने के लिए आशा जी से संपर्क कर रहे थे। मुंबई के एक स्टूडियो में इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान आशा जी ने एक-एक शब्द की बारीकी से जानकारी ली और कई दिनों तक राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग ली। उन्होंने गाने के लिए 25 हजार रुपए मांगे थे, लेकिन बातचीत के बाद सिर्फ 7 हजार रुपए स्वीकार किए, बिना किसी रोक-टोक के।

वीणा म्यूजिक के निर्देशक केसी मालू ने बताया कि वे आशा भोसले के साथ राजस्थानी गाने पर काम करना चाहते थे, लेकिन काम पूरा नहीं हो पाया। आशा जी ने उन्हें बताया कि वे जयपुर के उनके मित्र महिपाल और भरत व्यास के साथ अच्छे संबंध रखती हैं और उन्होंने आठ राजस्थानी भजन गाए हैं। यह सुनकर वे चकित हो गए।

आशा भोसले की राजस्थानी फिल्मों और भजनों में दी गई उपस्थिति ने इस क्षेत्रीय संगीत को नए आयाम दिए। वे बेहद मिलनसार और अपने संगीत के प्रति समर्पित थीं। उनके जाने से भारतीय संगीत जगत एक चमकदार सितारे को खो चुका है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!