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पूर्व हरियाणा मुख्यमंत्री हुड्डा ने सरकार के “मनमाने” नए नियमों पर फसल की कम खरीदारी को जिम्मेदार ठहराया

Former Haryana CM Hooda blames low procurement of crop on government’s “arbitrary” new rules

चंडीगढ़: पूर्व हरियाणा मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने हाल ही में फसल की कम खरीदारी को लेकर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने इसे सरकार द्वारा लागू किए गए नए “मनमाने” नियमों का सीधा परिणाम बताया है, जो किसानों के लिए चिंताजनक साबित हो रहे हैं।

हुड्डा ने कांग्रेस के सभी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले की गहनता से समीक्षा करें। उन्होंने सभी को अनुदानित किया है कि वे हरियाणा के सभी अनाज बाजारों का रोजाना दौरा करें, अधिकारियों को बुलाएं और उनसे मौके की वास्तविक स्थिति से अवगत हों। हुड्डा का मानना है कि जमीन पर जाकर ही सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है ताकि सरकार के फैसलों की वास्तविक प्रभावशीलता का मूल्यांकन हो सके।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि फसल खरीदारी में कमी किसानों की भावनाओं और उनकी आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि नई सरकार को चाहिए कि वह किसानों की समस्याओं को समझे और उनके हितों के अनुसार नीतियां बनाएं। उन्होंने अधिकारियों से भी आग्रह किया है कि वे अनाज खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाएं ताकि किसानों का विश्वास पुनः बहाल हो सके।

हुड्डा की इस पहल को कांग्रेस पार्टी में एक सशक्त संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनकी सक्रियता किसानों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कांग्रेस के अन्य नेता भी इस मामले में हुड्डा के साथ बराबर खड़े हैं और किसानों की आवाज को उच्चतम स्तर पर पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम सरकार के लिए एक चुनौती हो सकता है, क्योंकि किसानों की शिकायतें और फसल खरीद की कमी का सीधा असर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो इससे किसान एवं सरकार के बीच तनाव बढ़ सकता है।

फिलहाल, कांग्रेस नेताओं द्वारा किए जा रहे बाजार दौरे और अधिकारियों के समक्ष कट्टर संवाद से उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश की कृषि स्थिति में सुधार होगा और किसानों को राहत मिलेगी। यह भी संभावना जताई जा रही है कि सरकार इस विषय पर पुनर्विचार कर नए नियमों में संशोधन कर सकती है।

हरियाणा की जनता और कृषि क्षेत्र की निगाहें इस पर लगी हैं कि आने वाले दिनों में राजनीतिक नेतृत्व किस प्रकार किसानों के हित में कार्य करता है और कृषि क्षेत्र में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाता है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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