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नोएडा में आठवें दिन भी फैक्ट्री वर्कर्स का प्रदर्शन जारी: गुरुग्राम में सैलरी रिवीजन के बाद भी विरोध, बिहार व गुजरात में कर्मचारियों ने हड़ताल की

नोएडा में 8वें दिन भी फैक्‍ट्री वर्कर्स का प्रदर्शन:ग्रुरुग्राम में सैलरी रिवीजन के बाद भी विरोध; बिहार, गुजरात में भी कर्मचारियों की हड़ताल

नोएडा में फैक्ट्री वर्कर्स का प्रदर्शन आठवें दिन भी जारी है। 9 अप्रैल से शुरू हुआ यह आंदोलन सैलरी बढ़ाने और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर हो रहा है। करीब 42 हजार कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वेतन वृद्धि की मांग पूरी न होने के कारण वर्कर्स ने इस आंदोलन को उग्र रूप दे दिया है।

13 अप्रैल को प्रदर्शन के दौरान नोएडा के सेक्टर 60, 62, 84 व फेज-2 इलाकों में भीड़ ने फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस से भी झड़प हुई। पुलिस के अनुसार हिंसा की शुरुआत नोएडा के फेज-2 क्षेत्र से हुई, जहां मदरसन, ऋचा ग्लोबल, रेनबो, पैरामाउंट, एसएनडी और अनुभव जैसी कंपनियां स्थित हैं। इन कंपनियों के करीब 1000 से अधिक कर्मचारी वेतन वृद्धि को लेकर पिछले छह दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।

हरियाणा में हाल ही में सैलरी रिवीजन के बावजूद वर्कर्स नाखुश हैं और उनका मानना है कि बढ़ी हुई सैलरी महंगाई के स्तर से काफी कम है। गुरुग्राम के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इंप्लॉयज यूनियन के नेता वसंत कुमार ने कहा, “इतनी सैलरी में किसी तरह भी गुरुग्राम जैसी महंगी जगह पर जीवन बिताना मुश्किल है। नए लेबर कोड, एलपीजी संकट और खराब वर्किंग कंडीशंस मजदूरों के हित में नहीं हैं। इसलिए हमारा विरोध जारी रहेगा।”

वर्कर्स केंद्र सरकार के नए लेबर कोड्स के भी विरोध में हैं। उनके मुताबिक ये कोड्स 12 घंटे की शिफ्ट तय करते हुए ओवरटाइम का उचित भुगतान नहीं करते हैं, जिससे मजदूरों का शोषण हो सकता है। नए नियमों के अनुसार वर्कर्स सप्ताह में 48 घंटे तक काम करेंगे और उन्हें हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी भी मिलेगी। हालांकि वर्कर्स को डर है कि फैक्ट्री मालिक 8 घंटे के वेतन में ही 12 घंटे काम करवाएंगे। 16 अप्रैल को म्युनिसिपल और स्टेट वर्कर्स ने तीन घंटे का काम बंद कर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

प्रदर्शन में शामिल वर्कर्स का कहना है कि वर्तमान वृद्धि मात्र 200 या 341 रुपए केवल नाम मात्र की है और इससे ठीक से जीवन यापन संभव नहीं है। कई वर्कर्स ने सैलरी के भुगतान में देरी, ओवरटाइम भुगतान न होना और खराब वर्किंग कंडिशन्स की भी शिकायतें प्रकट कीं। उन्होंने कहा कि किराया, खाना और सिलेंडर के बढ़े दामों के सामने यह वेतन अपर्याप्त है।

उत्तर प्रदेश में अंतिम बार 2012 में न्यूनतम वेतन का पुनः निर्धारण हुआ था। मिनिमम वेज एक्ट के तहत राज्य सरकारें श्रमिकों के वेतन का निर्धारण करती हैं, जो क्षेत्र और श्रमिक की योग्यता पर आधारित होता है। हरियाणा में अप्रैल के पहले सप्ताह में फैक्ट्री वर्कर्स की हड़ताल के बाद सरकार ने 35% सैलरी वृद्धि की घोषणा की थी, जिससे वहां मजदूरों की रोजाना आय 580 से 750 रुपए के बीच होने लगी। इसके विपरीत नोएडा में यह मात्र 350 से 400 रुपए ही है।

मिनिमम वेज एक्ट के अनुसार वेतन को तीन वर्ष में एक बार पुनः निर्धारित करना आवश्यक है। केन्द्र सरकार के नए कोड ऑन वेजेस-2019 के तहत वेतन निर्धारण में कौशल स्तर, भौगोलिक स्थिति और महंगाई भत्ता को ध्यान में रखा जाता है। हालांकि मजदूरों का यह भी आरोप है कि वेतन वृद्धि ठीक समय पर नहीं होती और महंगाई भत्ते का भुगतान भी नहीं कराया जाता।

बिहार के बरौनी, गुजरात के सूरत, हरियाणा के मानेसर और पानीपत में भी हाल के दिनों में मजदूरों ने समान मांगों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। बिहार में वेतन वृद्धि, कार्य समय सीमित करने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। गुजरात के सूरत में भी कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर्स ने हड़ताल की।

विभिन्न राज्यों में हो रहे मजदूर प्रदर्शनों ने सरकारों पर दबाव बनाया है कि वे श्रमिकों के हितों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाएं। हालांकि नोएडा और आस-पास के क्षेत्रों में आंदोलन जारी है और मजदूर अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। इस संघर्ष का अगला अध्याय इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन व उद्योगपतियों द्वारा मजदूरों की मांगों को किस हद तक माना जाता है।

— रिपोर्टर: सोनाली राय

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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