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क्यों अगली पीढ़ी के इंजीनियर को सिस्टम्स थिंकर होना आवश्यक है

Why the next-generation engineer must be a systems thinker

डिजिटल सुरक्षा से लेकर जलवायु परिवर्तन तक, आज की दुनिया जटिल और जुड़े हुए वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में पारंपरिक इंजीनियरिंग शिक्षा और काम के तरीकों में तेजी से बदलाव आवश्यक हो गया है। थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के पद्मकुमार नायर का कहना है कि पुरानी सीमित और अलग-थलग सोच अब काम नहीं कर सकती, बल्कि आज की जरूरत है सिस्टम्स थिंकिंग की।

पद्मकुमार नायर ने कहा, “हम जिस प्रकार के समस्याग्रस्त मुद्दों का सामना कर रहे हैं वह इतने पेचीदा हैं कि पारंपरिक इंजीनियरिंग दृष्टिकोण असमर्थ रह जाते हैं। इन्हें समझने और हल करने के लिए बहु-आयामी सोच और समग्र दृष्टिकोण जरूरी है।”

सिस्टम्स थिंकिंग का मतलब है पूरी प्रणाली को समझना और विभिन्न घटकों के बीच अंतर्संबंधों को पहचानना। यह सूक्ष्म और व्यापक दृष्टिकोण दोनों को जोड़ता है ताकि समस्याओं को गहराई से समझा जा सके और उनकी जड़ों तक जाकर समाधान निकाला जा सके।

शिक्षा के क्षेत्र में भी इसे लागू करना जरूरी है। नायर ने सुझाव दिया है कि इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में पारंपरिक विषयों के अलावा लीडरशिप, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन और डेटा विश्लेषण को भी शामिल किया जाए ताकि विद्यार्थी व्यापक परिप्रेक्ष्य विकसित कर सकें। इससे वे न केवल तकनीकी समाधान खोज सकेंगे बल्कि उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का भी मूल्यांकन कर सकेंगे।

उन्होंने कहा, “इंजीनियर को अब तकनीकी विशेषज्ञ से बढ़कर एक रणनीतिक सोच वाला सिस्टम डिजाइनर होना होगा जो विभिन्न जटिलताओं और औद्योगिक परिवर्तनों को समझते हुए नवाचार लाए।”

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रगति के तेजी से विकास के कारण, तकनीकी दक्षता के साथ-साथ क्रॉस-डिसिप्लिनरी ज्ञान होना भी अनिवार्य हो गया है। प्रणालीगत दृष्टिकोण से इंजीनियर अधिक उत्तरदायी, लचीले और प्रभावशाली बनते हैं।

आज के इंजीनियरिंग क्षेत्र में पर्यावरणीय स्थिरता, साइबर सुरक्षा, स्मार्ट तकनीकें, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषय तेजी से महत्त्वपूर्ण हो रहे हैं। इन सभी विषयों में गहरा अंतर्संबंध है, जो सिस्टम्स थिंकिंग के बिना समझ पाना कठिन है।

कई तकनीकी शैक्षणिक संस्थान भी अब इस क्रांति को स्वीकार कर अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव कर रहे हैं। वे परियोजना-आधारित शिक्षण, बहुविषयक सहयोग और व्यावहारिक अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं।

पद्मकुमार नायर का निष्कर्ष है कि अगर हम भविष्य में टिकाऊ और नवोन्मेषी समाधान चाहते हैं तो इंजीनियरिंग शिक्षा को भी उसके अनुरूप तैयार करना होगा। सिस्टम्स थिंकिंग ही वह कुंजी है जो बहुआयामी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर सकती है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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