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हाथ-पैर से काम नहीं कर सकता, फिर भी 10वीं में 100% लाया: लेटे-लेटे पढ़ाई करता है; पिता गोद में उठाकर स्कूल ले जाते हैं

हाथ-पैर से कुछ काम नहीं कर सकता,10वीं में 100% आए:लेटे-लेटे करता है पढ़ाई; गोद में उठाकर स्कूल लेकर जाते हैं पिता

जयपुर: सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे 18 वर्षीय लक्षित परमार ने राजस्थान बोर्ड के 10वीं कक्षा की दिव्यांग श्रेणी में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर एक मिसाल कायम की है। भौतिक रूप से अत्यंत असमर्थ होने के बावजूद लक्षित ने लगातार मेहनत और परिवार के समर्थन से यह अद्भुत उपलब्धि हासिल की।

लक्षित को लिखने में काफी कठिनाई होती है, वे खुद अपना नाम तक नहीं लिख पाते। बोर्ड परीक्षा में नियमों के तहत उन्हें एक राइटर की सुविधा मिली, जो उनके लिए 9वीं कक्षा का एक छात्र था। गुरुवार दोपहर राजस्थान बोर्ड ने उनका रिजल्ट जारी किया। उसके साथ कोई भी रिजल्ट होल्ड में था, लेकिन लक्षित का परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आया।

लक्षित के पिता, दिनेश कुमार परमार, अपने बेटे की इस उपलब्धि को देखकर भावुक हो उठे। उन्होंने बताया, “परिवार के कुछ लोग मेरे बेटे की शारीरिक अक्षमता पर शक करते थे, लेकिन आज वही लोग मुझे फोन कर बधाई दे रहे हैं। मेरा बेटा हाथ-पैर से कोई काम नहीं कर सकता, अपनी मर्जी से ज्यादा हिल भी नहीं पाता। उसे मैं गोद में लेकर स्कूल जाता था।”

लक्षित का सपना सिविल सेवा में सफल होकर कलेक्टर बनना है। उन्होंने कहा, “मैं रोजाना 3-4 घंटे पढ़ाई करता था। साइंस मेरा पसंदीदा विषय है, साथ ही मैं फिलॉसफी पढ़ना भी पसंद करता हूं। मैंने कभी अपनी हालत पर दुख नहीं किया क्योंकि मैं जो हूं उसमें खुश हूं।” वे ज्यादातर समय ऑनलाइन पढ़ाई करते थे और परिवार का पूरा समर्थन मिला।

अचानक आई इस सफलता के पीछे लक्षित की मेहनत, परिवार का प्यार, शिक्षकों और दोस्तों का सपोर्ट अहम भूमिका निभाई है। लक्षित की मां रेखा परमार ने बताया कि वे कई अस्पतालों में इलाज करवाते रहे लेकिन बीमारी का कोई पूर्ण इलाज नहीं हो पाया। घर में दो छोटी बहनें भी सभी कामों में उनकी मदद करती हैं।

लक्षित की कक्षा की शिक्षिका निर्मला सालवी ने कहा कि वे बहुत जिज्ञासु और समझदार विद्यार्थी हैं। वे कम सवाल पूछते हैं और खुद से समाधान खोजते हैं। उनकी बहन दीया ने बताया कि लक्षित हर काम में गहरी सोच रखते हैं और परिवार को पढ़ाई को हथियार बनाने की प्रेरणा देते हैं।

18 साल के लक्षित ने कठिनाइयों को मात देते हुए यह साबित कर दिया है कि सही दिशा, मेहनत और प्यार से हर बाधा को पार किया जा सकता है। उनकी कहानी न केवल दिव्यांग बच्चों के लिए प्रेरणा है बल्कि समाज के लिए भी मिसाल है कि शारीरिक सीमाओं को पार कर कैसे मनोबल के साथ सफलता पाई जा सकती है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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