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तीन युवकों की मौत और अंधी गुत्थी, हादसा या हत्या की साजिश

तीन युवकों की मौत एक अंधी गुत्थी, मौत या साजिश
200 किलो गांजा बरामद, लेकिन तीन युवकों की मौत का सच अब भी दबा हुआ!

शहडोल।

13-14 अप्रैल की रात जैतपुर थाना क्षेत्र में कमता तिराहे पर हुई तीन युवकों की मौत ने पुलिस की कार्यशैली को सवालों के घेरे में डाल दिया है।हादसे ने कई सवालों को जम्म दिया और खाकी की ईमानदारी को कटघरे में खड़ा कर दिया एक के बाद एक कई सवाल लोगों के जहन में है जो इस गुत्थी को सुलझाने से पहले उलझा देती है ।

“इंदौरी साहब” की चंद लाइने हैं- कि लगेगी आग तो आएँगे कई घर जद में यहाँ सिर्फ अपना मकान थोड़ी है…मतलब कि न सिर्फ वो तीन युवक मरे बल्कि अपने पीछे कई किस्से और किरदार छोड़ गए जो इस पूरे पटकथा के लेखक से लेकर डायरेक्टर, और एक्टर हैं।
अब, यह एक हादसा नही बल्कि खाकी के गले की वो फांस बन गई है जिसे न तो लीला जा पा रहा है और न ही उगला जा रहा है और उगलने का तो कोई सवाल ही नही।
अब तक पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोपियों को दबोचकर 200 किलो गांजा बरामद किया, लेकिन क्या सच में यही सब कुछ था? या फिर इस सब के पीछे कुछ और छिपा है, जिसे पुलिस दबाने की कोशिश कर रही है?

गांजा बरामदगी के पीछे छिपा हो सकता है बड़ा राज

पुलिस ने दावा किया कि दो आरोपियों को शंकर विश्वकर्मा और हीरा सिंह के पास से 20 लाख रुपए की कीमत का 200 किलो गांजा बरामद किया गया है। लेकिन क्या यही वह मुद्दा है जिस पर पूरे मामले को लपेटने की कोशिश की जा रही है? क्या यह असली कारणों को छिपाने की साजिश नहीं है? सवाल उठता है कि यदि यह एक सामान्य हादसा था, तो हादसे के वक्त घटनास्थल पर मौजूद कार के चालक ने मदद क्यों नहीं मांगी? क्या वह जानबूझकर भागने की कोशिश कर रहा था, ताकि किसी और सुराग को मिटाया जा सके?
सवाल है….
●जब गाड़ी भिड़ी और पुलिस उनका पीछा कि तो वो 60 फ़ीट की दूरी कुएं तक कैसे पहुँचे?
●जब गाड़ी भिड़ी तो युवको को चोट भी आया होगा फिर ड्राइवर सीट से लेकर पीछे की सीट में बैठने वाले तीनो युवक एक ही दिशा में एक साथ कैसे भागे?
●क्या तीनो एक दूसरे का हाथ पकड़कर भाग रहे थे या फिर एक दूसरे के पीछे?
●यदि एक दूसरे के पीछे भाग रहे थे तो एक के बाद एक-एक करके तीनो गिरते चले गए?
●क्या इस सुनसान रात में पुलिस को कुएं में गिरते उन युगको की धमक सुनाई नही दी ओर अगर दी तो पुलिस उन्हें बचाई क्यों नही?
●जिस आरक्षक के सायरन से युवक भागे वह सीधे शहडोल क्यों गया उसने इसकी जानकारी अपने वरिष्ठों को क्यों नही दी
●पुलिस शव देखने से पूर्व ही नाम कैसे उजागर कर दी

गायब हुआ कार मालिक, पुलिस ने उसे मौका क्यों दिया?

पूरे घटनाक्रम में एक और बेहद संदिग्ध मोड़ और आ रहा है जिस सफेद लग्जरी कार के बारे में पुलिस दावा कर रही है, उसका मालिक घटनास्थल पर पुलिस से पहले मौजूद था, लेकिन जैसे ही पुलिस पहुंची, वह फौरन गायब हो गया। सवाल यह है कि उसे क्यों भागने दिया गया? क्या पुलिस ने जानबूझकर उसे मौका दिया ताकि वह मौके पर मौजूद साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सके?
*पुलिस की पड़ताल और शिनाख्त पर सवाल*
पुलिस ने घटना स्थल से शवों की शिनाख्त तक कर डाली लेकिन शवों को निकाले बिना! क्या यह पुलिस की दिव्यदृष्टि थी, या फिर यह जल्दबाजी किसी बड़े सच को दबाने की कोशिश थी? स्थानीय लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं कि बिना शवों को बाहर निकाले, पुलिस ने कैसे इतनी जल्दी शिनाख्त कर दी? यह इशारा करती है कि पुलिस कुछ छिपाने की कोशिश कर रही रही है।

गांजा तस्करी और पुलिस का नाजायज़ कनेक्शन

सवाल यह भी है कि अगर ओडिशा से इतनी बड़ी गांजा की खेप लाई जा रही थी, तो पुलिस की नजरों से कैसे बच निकली? क्या यह तस्करी पुलिस के संरक्षण में चल रही थी? क्या पुलिस और तस्कर मिलकर इन तीन युवकों की जान के साथ खेल रहे थे? क्या यह हादसा महज एक हादसा था, या फिर इस तस्करी का हिस्सा?
यह घटना अब महज एक हादसा नहीं, बल्कि एक साक्ष्य और साजिशो का खेल है जिसमे परत दर परत सवाल और उसके उत्तर हैं। एक बात और पुलिस की हर थ्योरी में एक नया पेंच निकलकर सामने आ रहा है। अब सवाल यह है कि क्या यह सब साजिश को रफा-दफा किया जाएगा, या फिर सच का पर्दाफाश होगा?

अखबारों का कतरन…

नोट-हमारा पड़ताल जारी है और सूत्रों ने बताया कि  घटना के वक्त 5 अलग-अलग गाड़ियां थीं।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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