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सैलरी मांगने पर मिल रही जांच की बात: बड़ी कंपनियां नौकरी छोड़ने के बाद FNF देने से इनकार कर रही हैं, जानिए कर्मचारियों के अधिकार

सैलरी मांगों तो इंवेस्टिगेशन का हवाला:नौकरी छोड़ने पर बड़ी कंपनियां नकार रहीं FNF; क्‍या हैं कर्मचारियों के अधिकार

दिल्ली: नौकरी छोड़ने के बाद फुल एंड फाइनल (FNF) सेटलमेंट न मिलने की समस्या आज कई कर्मचारियों के लिए गंभीर विषय बन चुकी है। अर्नव पटेल, जो दिल्ली की एक कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे, ने लगभग तीन महीने पहले इस्तीफा दिया, लेकिन अब तक अपनी शेष सैलरी का इंतजार कर रहे हैं। नियमानुसार, अंतिम कार्य दिवस के दो दिनों के भीतर कंपनी को कर्मचारी को पूरा सेटलमेंट भुगतान करना अनिवार्य है। परंतु, अर्नव की कंपनी फुल एंड फाइनल भुगतान में लगातार देरी कर रही है।

अर्नव के मुताबिक, उन्होंने कई बार कंपनी को ई-मेल भेजकर अपना भुगतान मांगा, लेकिन या तो कोई जवाब नहीं मिला या HR विभाग ने बताया कि कंपनी में अंदरूनी जांच चल रही है और उसके परिणाम आने के बाद ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला किसी छोटे कार्यालय का नहीं, बल्कि बड़ी कंपनियों का है, जहां कर्मचारियों को बिना किसी स्पष्ट वजह के भुगतान रोक कर रखा जा रहा है।

दिल्ली की ही एक अन्य कर्मचारी अपर्णा को भी छंटनी के दौरान फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में लंबा इंतजार करना पड़ा। महीनों तक टालमटोल के बाद अंततः कानूनी सहायता लेकर उन्होंने अपनी बकाया सैलरी प्राप्त की। इससे स्पष्ट होता है कि कई बड़ी कंपनियां जांच या विवाद की बात कहकर कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी कर रही हैं।

नवंबर 2025 में लागू हुए नए लेबर कोड्स के तहत, कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अंतिम कार्य दिवस के दो दिन के भीतर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट कर दें। इसमें देरी होने पर कर्मचारी लेबर कोर्ट में शिकायत दर्ज कर सकते हैं और न केवल वेतन, बल्कि मानसिक तनाव और कानूनी खर्चों के लिए भी मुआवजा मांग सकते हैं। यदि कंपनी सैलरी होल्ड करती है, तो उसे इसकी वैध वजह स्पष्ट रूप से कर्मचारी को बतानी होगी, अन्यथा यह गैरकानूनी माना जाएगा।

अर्नव ने बताया कि इससे पहले भी कई कर्मचारियों को इसी प्रकार की जांच, पुलिस केस या इंटर्नल विवाद बताकर भुगतान से रोका गया है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

दैनिक भास्कर ने इस मामले में संबंधित कंपनियों से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस प्रकार की गैरजिम्मेदाराना व्यवहार की रोकथाम के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई और कर्मचारी जागरूकता को बढ़ावा देना जरूरी है।

कर्मचारियों को चाहिए कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और भुगतान न मिलने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें तथा वंचित वेतन के लिए उपयुक्त कानूनी प्रक्रिया अपनाएं।

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Author: Divya Kirti

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