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मेरठ बना प्रदेश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर: 42 डिग्री तापमान और 300 से ऊपर AQI ने प्रभावित किया जनजीवन

प्रदेश का तीसरा प्रदूषित शहर बना मेरठ:42 डिग्री तापमान और 300 पार AQI से प्रभावित हुआ जनजीवन, राहत के नहीं आसार

मेरठ में इन दिनों मौसम ने गंभीर रूप ले लिया है, जिससे जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। तेज गर्मी और बढ़ती हवा की प्रदूषण स्तर ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार मेरठ देश के 260 शहरों में प्रदूषण के मामले में तीसरे नंबर पर आ गया है। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 314 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।

इस सूची में गाजियाबाद पहले स्थान पर रहा जहां AQI 334 था, जबकि ग्रेटर नोएडा 331 AQI के साथ दूसरे स्थान पर था। यह आंकड़ा बताता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हवा की गुणवत्ता अब गंभीर संकट में है। उच्च AQI स्तर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है और यह सूचक है कि सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

शहर में इस सीजन का सर्वाधिक तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, वहीं न्यूनतम तापमान 21.1 डिग्री रहा। लगातार तेज़ धूप और लू जैसे गर्म मौसम ने बाहर निकलना मुश्किल बना दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर आमतौर पर सन्नाटा जैसा माहौल देखने को मिलता है, जो दिखाता है कि लोग खुद को बचाने के लिए घर के अंदर रहना बेहतर समझ रहे हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिन भी तापमान में वृद्धि की संभावना जताई है, जिससे समस्या और गम्भीर हो सकती है।

फिजिशियन डॉ. शैेलेंद्र सिंह के अनुसार, ज्यादा गर्मी और प्रदूषित हवा मिलकर स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहे हैं। वे बताते हैं कि इस मौसम में सांस लेने में तकलीफ, एलर्जी, आंखों में जलन और त्वचा की समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि अगर इस स्थिति में लम्बे समय तक रहा गया तो हीट स्ट्रोक होने और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों ने जनता को सलाह दी है कि वे ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं, घर के बाहर निकलने से बचें, खासकर दोपहर के समय। मास्क का उपयोग करें और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाएं। इसके अलावा यदि किसी को सांस लेने में दिक्कत या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। लोक प्रशासन को चाहिए कि वे प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाएं ताकि लोगों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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