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एलपीजी के लिए लम्बी कतार,हालात दिनों दिन बद्दतर

एलपीजी के लिए लम्बी कतार,हालात दिनों दिन बद्दतर
गोदाम के बाहर बेकाबू हालात

उपभोक्ताओं की बढ़ती समस्या और सिलेंडर की कालाबाजारी

शहडोल ।। विनय मिश्रा की रिपोर्ट

सरईकापा स्थित ऋचा गैस एजेंसी के बाहर इन दिनों गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें तो आम हो गई हैं, लेकिन प्रशासन की खामोशी और लापरवाही ने लोगों की मुसीबत को और बढ़ा दिया है। गैस सिलेंडर के वितरण में हो रही गड़बड़ी, “चूल्हा भाई सलाम” की स्थिति निर्मित कर रहीं है और सड़क पर खड़े होकर सिलेंडर वितरित करना अब रोज़ की बात हो चुकी है। ग्राहकों ने बताया कि गोदाम के बाहर गाड़ी वाला ज्यादा पैसा लेता है जबकि गोदाम में 900 रु ही देना पड़ता है हालात इस कदर भयावह है कि सिलेंडर लेने के लिए सड़कों पर जाम तो रहती है है बल्कि सडक के किनारे और सड़क पर गाड़ियाँ खड़ी करके सिलेंडर बांटा जा रहा है लोगों ने आरोप लगाया कि सिलेंडर की कालाबाजारी भी हो रही है और खाली सिलेंडरों में जिनमे थोड़ा बहुत गैस बचा रहता है उसमे अन्य भरे हुए गैस से रिफलिंग कर ली जाती है और 4,5 या 7 किलो बनाकर भी ठीक ठाक रेट में बेंचा जाता है ।
सवाल है कि जब नागरिकों को सस्ती और सुरक्षित गैस चाहिए, तो ऐसे खतरनाक हालात क्यों बने हुए हैं? इन कतारों में खड़ा होने वाला आम आदमी कब तक इंतजार करेगा? क्या प्रशासन को इन नागरिकों की तकलीफों की चिंता नहीं?
सबसे ज्यादा चिंताजनक बात ये है कि गैस एजेंसी के बाहर अत्यधिक कीमतों पर गैस सिलेंडर बेचे जा रहे हैं, और इसपर अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। क्या इस प्रकार के भ्रष्टाचार और हेराफेरी से प्रशासन की आंखें नहीं खुल रही? जानकारी के अनुसार, कुछ बिचौलिए भी पैसे लेकर सिलेंडर दे रहे हैं। और अगर ये बिचौलिये पकड़ में आ गए, तो क्या प्रशासन एक्शन लेगा, या फिर मौजूदा व्यवस्था इन्हें ढाल बनाकर अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास करती रहेगी?
जिस प्रकार से बिना सुरक्षा मानकों और बेकतार सिलेंडर सड़क पर बांटे जा रहे हैं, और उससे कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
समझने वाली बात यह है कि वर्तमान सरकार और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर मसले पर कब और कैसे ध्यान देंगे? क्या आम आदमी को महंगे सिलेंडर और असुरक्षित वितरण के साथ अपनी जान की कीमत पर इस सेवा का लाभ उठाने के लिए मजबूर किया जाएगा? या फिर कोई ठोस कदम उठाए जाएगा?

आखिर कब तक यह स्थिति यूं ही जारी रहेगी?

सरकार और प्रशासन को इस पर त्वरित और सख्त एकमत कार्य करना चाहिए ताकि गैस सिलेंडर वितरण में सुधार हो और जनता को उचित मूल्य पर और सुरक्षित तरीके से सिलेंडर मिल सके नही तो वह दिन दूर नही जब उपले और लकड़ियों का उपयोग घर-घर होगा और हम 21वी सदी में पहुचने के बजाय पुनः 90 के दशक में पहुंच जाएं खैर हालात नही सुधरे तो निश्चित ऐसे दिन देखने को मिलेंगे।

इनका कहना है…

फोन लगाने पर फोन नही उठा विपिन पटेल ,जिला खाद्य अधिकारी शहडोल

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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