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जिले में फैला गुंडाराज… शासकीय कमर्चारी भी सुरक्षित नही..!

जूते की नोक पर कानून व्यवस्था, माफियाओं ने बिगाड़ रखी है जिले की फिजा

गुंडे-बदमाशों की दहशत से शहर सहमा

दिनदहाड़े खनिज कार्यालय में धमकी

एसपी,कलेक्टर कार्यालय वहीं मौजूद

जनप्रतिनिधि बने मौनी बाबा

शहडोल।

जिले में कानून व्यवस्था जैसे पंगु हो गया है जिसे चलने के लिए एक नही बल्कि दो बैशाखी की जरूरत है। बीते 2-3 वर्षो से कानून व्यवस्था के जो हालात हैं वह आम जनता ही नही बल्कि यहाँ के नेताओं से भी नही छिपा। कभी दहशतगर्द दिनदहाड़े दो हत्या कर देते हैं तो कभी तीन लाशें संदिग्ध अवस्था मे मिलती हैं इस जिले में माफियाओं का किस प्रकार पैठ है इसके जीवंत उदारहण समय-समय पर देखने को मिलते रहते हैं कभी किसी पुलिस कर्मी की हत्या की जाती है कभी पटवारी की कभी वनकर्मियों के साथ मारपीट बदसलूकी होती है कभी खनिज कार्यालय में घुसकर खनिज सर्वेयर को धमकी दी जाती है और ऐसे में आप कहो कि जिले में कानून व्यवस्था के नाम पर रामराज्य चल रहा है तब तो शायद यहाँ की जनता को अपने खिड़की दरवाजे खोलकर सोना चाहिए।
खनिज सर्वेयर को धमकी देकर माफियाओं ने न केवल प्रशासन को खुले आम चुनौती दी है, बल्कि प्रशासन की कार्यवाही और उनके ईमानदारी पर सीधे-सीधे सवाल है कि आखिर किस हैसियत से माफियाओं का एक झुंड खनिज कार्यालय में घुसकर खनिज सर्वेयर को धमकी देते हैं जबकि वहाँ कलेक्टर और एसपी आफिस अगल-बगल ही हैं इस व्यवस्था को देखकर लगता है कि प्रशासन किस चिडिया का नाम है?

जनप्रतिनिधियों के विधानसभा क्षेत्र में होती रही निर्मम हत्याएं और वारदात पर जनप्रतिनिधि मौनी बाबा बने रहे

ब्यौहारी क्षेत्र में रेत माफिया द्वारा पुलिस,पटवारी की हत्या हो,नायब तहसीलदार को धमकी या गाड़ी चढा देने की जहमत हो , नबलपुर क्षेत्र में वनकर्मियों पर बदमाशों का हमला हो, जैतपुर के बलबहरा में डबल मर्डर केस हो या फिर बीते दिनों जैतपुर में तीन संदिग्ध मौत हो इन सभी विषयों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुह नही खोला और मौन धारण किए मौनी बाबा बने रहे जिसका अंजाम खनिज कार्यालय में माफियाओं की धमकी-घुड़की के रूप में सामने आता है जिस प्रकार से एक शासकीय कार्यालय में घुसकर एक शासकीय कर्मचारी को धमकी दी गई इससे तो इस बात से भी नकारा नही जा सकता कि वो पुलिस के बड़े वरिष्ठ अधिकारियों के एक साथ भी ऐसा बर्ताव कर सकते हैं।

खनिज कार्यालय में धमकी

रेत माफियाओं की एक और करतूत खनिज कार्यालय में देखने को मिली, जहां माफियाओं ने सर्वेयर को धमकाया। यह घटना तो जैसे चुटकुले जैसा लगने लगा है – सरकारी कर्मचारी अपने ही दफ्तर में सुरक्षित नहीं। रेत माफियाओं की दबंगई ने खनिज विभाग को भी अपनी ताकत दिखा दी।सवाल है कि क्या खनिज विभाग के अधिकारी केवल बुलेटप्रूफ वेस्ट में बैठकर रिपोर्ट लिखने के लिए हैं, या माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए भी तैयार हैं? जिले की जनता कह रही है “कहां गए वो कानून के रक्षक?” अगर प्रशासन का यही हाल रहा तो माफिया के खिलाफ कार्रवाई की तो उम्मीद छोड़िए, जनता को सुरक्षा भी न मिलेगी। लोग अब तो यही कह रहे हैं कि यह प्रशासन माफियाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है, क्योंकि इनकी कारगुजारियों को देखकर तो ऐसा ही लगता है। जिस प्रकार की कानून ,व्यवस्था है और शासकीय सेवक से लेकर जनता असुरक्षित, इससे माफियाओं की ताकत तो बढ़ती जा रही है, पर पुलिस की ताकत नहीं, बस छड़ी-लाठी तक सीमित है हलाकि यह कहना अतिश्योक्ति नही कि जिले की बिगड़ती कानून व्यवस्था के जिम्मेदार कानून के रक्षक ही है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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