दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

100% एथेनॉल मिश्रण क्या है? | विस्तार से समझाया गया

What is 100% ethanol blending? | Explained

वायुयान उद्योग में सतत और पर्यावरण-मित्र ईंधन उत्पादन को लेकर हमेशा नई तकनीकों और नवाचारों का अनुसंधान जारी रहता है। वर्तमान में, सतत विमान ईंधन (Sustainable Aviation Fuel – SAF) की मांग तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में पर्यावरण पर कम प्रभाव डालता है। लेकिन सतत विमान ईंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मुख्य चुनौती यह बनी हुई है कि किस प्रकार चीनी की खेती पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना उत्पादन को बढ़ाया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिशा में दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल (Second-Generation Ethanol) के व्यावसायिक उत्पादन को तेजी से अपनाना एक महत्वपूर्ण कदम होगा। दूसरा पीढ़ी एथेनॉल, जिसे सेलुलोज़िक एथेनॉल भी कहा जाता है, पारंपरिक फसल आधारित उत्पादन से अलग होता है। यह मुख्यतः पुआल, लकड़ी, कृषि अपशिष्ट और अन्य गैर-खाद्य बायोमास संसाधनों से निर्मित होता है, जिससे मुख्य खाद्य फसलों जैसे गन्ने की खेती पर दबाव नहीं पड़ता।

गन्ना आधारित पहली पीढ़ी के एथेनॉल उत्पादन में वर्षों से उत्पादन सीमा और संसाधन सीमाएं सामने आई हैं, क्योंकि गन्ने की खेती की भूमि सीमित है और इसका अत्यधिक उत्पादन पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल के व्यावसायिक निर्माण से न केवल पर्यावरणीय जोखिम कम होंगे, बल्कि यह सतत एविएशन ईंधन के क्षेत्र में क्षमता विस्तार की दिशा में भी सहायक होगा।

सरकारी और निजी क्षेत्र की नीतियां तथा निवेश अब इस प्रकार के पर्यावरण अनुकूल ईंधनों के विकास को त्वरित करने में सहायक भूमिका निभा रहे हैं। वैज्ञानिक और तकनीकी रिसर्च के क्षेत्र में जारी प्रयास यह संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल की उत्पादन लागत में कमी आएगी और इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर होगा।

इससे न केवल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि यह भारत समेत विश्व के कई देशों के विमानन क्षेत्र को स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराने में मदद करेगा। ऐसे में यह स्पष्ट है कि सतत एविएशन ईंधन के उत्पादन में समग्र बढ़ोतरी का आधार दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल की वाणिज्यिक मात्रा के विकास की गति पर निर्भर करेगा।

इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए, विज्ञान, उद्योग और नीति निर्धारकों को मिलकर पर्यावरण हितैषी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य समाधान निकालने होंगे, ताकि न केवल पर्यावरण की सुरक्षा की जा सके, बल्कि ऊर्जा जरूरतों की निरंतर आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सके।

Source

Author:

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!