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रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा: 1 डॉलर की कीमत 95.20 रुपए हुई, विदेशी वस्तुएं महंगी होंगी

रुपया रिकॉर्ड ऑल टाइम लो पर आया:1 डॉलर की कीमत 95.20 रुपए हुई, इससे विदेशी वस्तुएं महंगी होंगी

नई दिल्ली, 30 अप्रैल: भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले एक नए रिकॉर्ड निचले स्तर 95.20 रुपए पर पहुंच गया है। यह विनिमय दर भारत के लिए चिंताजनक संकेत मानी जा रही है क्योंकि इससे घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति में होने वाली व्यवधान इस गिरावट के मुख्य कारण है।

विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान में युद्ध जारी रहा तो रुपये की गिरावट और तेज हो सकती है और यह दर 98 रुपए प्रति डॉलर तक जा सकती है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त दबाव उत्पन्न कर सकती है, विशेषकर विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच। पिछले कुछ वर्षों में, वैश्विक व्यापारिक तनावों के बढ़ने के कारण भी रुपया दबाव में रहा है।

विशेषज्ञों ने बताया कि रुपया साल 2026 की शुरुआत से कमजोर पड़ना शुरू हुआ था। दिसंबर 2025 में पहली बार डॉलर की कीमत रुपया 90 के पार पहुंची थी, जिससे ही गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ। इस बार यह 95.20 रुपए के स्तर तक पहुंच गई है, जो पिछले रिकॉर्ड से भी कम है। यह स्थिति घरेलू उत्पादों और सेवाओं की महंगाई पर सीधे असर डाल सकती है क्योंकि ज्यादातर कच्चा माल और तकनीकी उपकरण विदेश से आयात किए जाते हैं।

मिडिल ईस्ट युद्ध को दशक का सबसे गंभीर ऊर्जा संकट माना जा रहा है। इस संकट का सीधा प्रभाव भारत पर पड़ रहा है क्योंकि हमारा देश तेल और गैस जैसे जरूरी ऊर्जा संसाधनों के लिए निर्भर है। करंसी मार्केट में करेंसी की कीमतें अनेक कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन रिजर्व) की स्थिति प्रमुख होती है।

जब डॉलर की कीमत बढ़ती है, तो रुपये की कीमत गिरती है, इसे मुद्रा का कमजोरी या करेंसी डेप्रिसिएशन कहते हैं। भारत के पास पर्याप्त फॉरेन रिजर्व होने पर यह गिरावट कुछ हद तक रोक सकते हैं, लेकिन वर्तमान में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता की वजह से रिजर्व पर भी दबाव बना हुआ है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि भारत के रिजर्व में डॉलर की पर्याप्त मात्रा बनी रही, तो रुपये की स्थिति स्थिर रह सकती है। वरना महंगाई के साथ-साथ आयात वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होगी, जिससे आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

देश के वित्त और अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ इस समय सावधानी रखने और संभावित जोखिमों से निपटने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक की सक्रिय भूमिका की अपेक्षा कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली को रोकने और रुपया को मजबूती देने के प्रयासों में तेजी आने की जरूरत है ताकि आने वाले समय में आर्थिक संतुलन कायम रखा जा सके।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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