दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

सबसे मुश्किल बात यह जानना है कि आप अब अपने सर्वोत्तम स्तर पर नहीं हैं – रूनी

Hardest thing is knowing you're no longer at your best - Rooney

पूर्व इंग्लैंड और मैनचेस्टर यूनाइटेड के स्ट्राइकर वेन रूनी ने फुटबॉल जगत में एक महत्वपूर्ण सच को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि फुटबॉलर के लिए सबसे कठिन स्थिति वह होती है जब उन्हें एहसास होता है कि वे अब पहले जैसे खिलाड़ी नहीं रहे।

रूनी ने अपनी लंबी करियर यात्रा में कई उतार-चढ़ाव का सामना किया है और उन्होंने बताया कि एक खिलाड़ी के लिए अपनी गिरावट को स्वीकार करना भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि यह न केवल शारीरिक प्रदर्शन में कमी का मुद्दा होता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी यह भारी पड़ता है।

वेन रूनी का इस बात पर जोर है कि खेल का आनंद तब सबसे अधिक होता है जब खिलाड़ी अपनी पूरी क्षमता पर होता है। लेकिन समय के साथ, हर खिलाड़ी को यह स्वीकार करना पड़ता है कि उसकी फिटनेस, स्पीड और तकनीकी कौशल उतने नहीं रहे जितने पहले थे। यह परिवर्तन उनके लिए एक कठिन सच्चाई बन जाती है।

इस बात को लेकर रूनी ने कहा, “जब आप जानते हैं कि आप अपना सर्वोत्तम स्तर नहीं दे पा रहे, तो यह सबसे दुखद और कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे समय में खिलाड़ी को खुद से लड़ना होता है और यह समझना होता है कि अब उन्हें अपनी भूमिका बदलनी होगी या नई चुनौतियों का सामना करना होगा।”

रूनी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा कि फुटबॉल में करियर की निरंतरता बनाए रखना और खुद को नई भूमिका में ढालना एक कला है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपनी खेल योग्यता को समझें और खेल के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं, ताकि वे सही समय पर सही निर्णय ले सकें।

फुटबॉल जगत में वेन रूनी की यह अंतर्दृष्टि खिलाड़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम कर सकती है, जो अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर आते हैं और अपनी प्रतिभा के अनुसार बदलाव की आवश्यकता महसूस करते हैं।

इस प्रकार, पूर्व फुटबॉलर के नजरिए से यह स्पष्ट होता है कि खेल की दुनिया में अपने चरम से नीचे उतरना एक दुखद लेकिन स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसका सामना हर खिलाड़ी को करना पड़ता है। इसकी स्वीकृति और समझ ही खिलाड़ी को नई दिशा में ले जाने में मदद कर सकती है।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!