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वैश्विक अध्ययन ने खुलासा किया कि साइकेडेलिक्स कैसे मस्तिष्क की पदानुक्रम प्रणाली को समाप्त करते हैं

Global study reveals how psychedelics dissolve the brain’s hierarchy

नई न्यूरोइमेजिंग तकनीकों के माध्यम से किए गए ताज़ा शोध से पता चला है कि कई प्रकार के साइकेडेलिक्स मस्तिष्क पर लगभग एक समान प्रभाव डालते हैं। इस अध्ययन ने साइकेडेलिक अनुभव का एक ‘कोर सिग्नेचर’ यानी मूल अभिज्ञापक पैटर्न उजागर किया है, जो इस क्षेत्र के लिए वैज्ञानिकों के बीच गहरी समझ का मार्ग प्रशस्त करता है।

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने विभिन्न साइकेडेलिक पदार्थों के तंत्रिका प्रभावों का विश्लेषण किया। इन पदार्थों ने मस्तिष्क की पदानुक्रम संरचना को प्रभावित करते हुए न्यूरल नेटवर्क्स के बीच संयोजन को बदल दिया। इससे यह समझने में मदद मिली कि साइकेडेलिक्स कैसे मानसूत्री अनुभूति, चेतना की व्यापकता और आत्म-समझ में बदलाव लाते हैं।

मस्तिष्क में सामान्यतः विभिन्न कार्य अलग-अलग स्तरों पर होते हैं, जिन्हें पदानुक्रम कहा जाता है। यह शोध बताता है कि इन पदार्थों के सेवन से उच्च स्तर की नियंत्रण प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे मस्तिष्क के निम्न स्तर के नेटवर्क और अधिक स्वतंत्र रूप से संचालित होते हैं। नतीजतन, मस्तिष्क की सूचना प्रसंस्करण और अनुभूति की सीमाएं धुंधली हो जाती हैं।

शोध प्रमुखों में से एक ने कहा, “यह अध्ययन पहली बार यह दिखाता है कि विभिन्न साइकेडेलिक यौगिकों में एक साझा तंत्र होता है, जो मस्तिष्क के पदानुक्रम को ढीला करता है। यह खोज न केवल मानसिक स्वास्थ्य के लिए नए उपचार विकल्पों को बढ़ावा देती है, बल्कि मानसिक चेतना की मूल प्रकृति को समझने में भी मदद करती है।”

अब वैज्ञानिक इस ‘कोर सिग्नेचर’ का उपयोग मानसिक बीमारियों जैसे डिप्रेशन, PTSD और अन्य न्यूरोसायकियाट्रिक विकारों के लिए बेहतर उपचार विकसित करने की दिशा में कर रहे हैं। इससे उम्मीदें बढ़ी हैं कि साइकेडेलिक्स के सुरक्षित और नियंत्रित उपयोग से रोगियों को लंबे समय तक स्थायी लाभ मिल सकते हैं।

इस शोध से यह भी पता चलता है कि मस्तिष्क का कार्य एक गतिशील और लचीला तंत्र है, जो विभिन्न यौगिकों के प्रभाव में बदले हुए आयामों में काम कर सकता है। साइकेडेलिक पदार्थों का अध्ययन करते हुए यह नयी खोजें हमें मानव चेतना के रहस्यों के करीब ले जा रही हैं।

अंतिम रूप से यह शोध विज्ञान और चिकित्सा दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जहां दवा के क्षेत्र में पारंपरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए, मस्तिष्क और मन को समझने के नए रास्ते खुल रहे हैं।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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