दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

एयर इंडिया ने सिंगापुर एयरलाइंस को 945 मिलियन डॉलर का घाटा पहुंचाया, FY26 में लाभ में 57% की गिरावट

Air India inflicts $945 million hit on Singapore Airlines, dragging FY26 profit down 57%

वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) एयर इंडिया और सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) के बीच नए कॉर्पोरेट गठजोड़ के तहत कई महत्वपूर्ण वित्तीय चुनौतियों का सामना करने वाला वर्ष साबित हुआ है। FY26 में सिंगापुर एयरलाइंस ने एयर इंडिया के 25.1% हिस्सेदारी वाले संयुक्त एयर इंडिया-विस्तारा एंटिटी में निवेश के बाद पहली बार एयर इंडिया के घाटे को सीधे अपने खाते में शामिल किया। इस कदम से सिंगापुर एयरलाइंस के FY26 के वित्तीय नतीजों पर गहरा असर पड़ा है, जहाँ कंपनी का लाभ 57% तक गिर गया है।

एयर इंडिया ने FY26 में लगभग 945 मिलियन डॉलर का वित्तीय नुकसान सिंगापुर एयरलाइंस के हिस्से में दिया है, जो कि संयोजन की जटिलताओं और एयर इंडिया के पूर्व आंतरिक समस्याओं के प्रभाव के कारण हुआ। पिछले वर्षों में एयर इंडिया को लगातार दबाव का सामना करना पड़ा था, जिसमें उच्च परिचालन लागत, ईंधन की बढ़ती कीमतें, और कोरोना महामारी के बाद यात्रा मांग में धीमी रिकवरी प्रमुख कारक थे।

सिंगापुर एयरलाइंस के लिए यह घाटा न केवल अचानक वित्तीय बोझ लेकर आया है, बल्कि कंपनी की मुनाफाखोरी दर में भी भारी गिरावट का संकेत है। इस असर ने FY26 में सिंगापुर एयरलाइंस के कुल लाभ में 57 प्रतिशत तक की कमी की रिपोर्ट की है, जो वाणिज्यिक दृष्टि से एक बड़ा झटका है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह घाटा सिंगापुर एयरलाइंस की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें भारत के बड़े विमानन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करना शामिल है। एयर इंडिया के पुनर्गठन और विस्तार योजनाएँ भविष्य में इस नुकसान को संतुलित कर सकती हैं, लेकिन फिलहाल FY26 की स्थिति चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगापुर एयरलाइंस को एयर इंडिया में अपनी हिस्सेदारी का प्रबंधन करते हुए लागत नियंत्रण और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके अलावा, एयर इंडिया की सेवाओं और फ्लाइट नेटवर्क का विस्तार भी कंपनी के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

भारतीय विमानन बाजार की तेजी से बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं में सुधार आने की संभावना से सिंगापुर एयरलाइंस को अपने वित्तीय घाटे को कम करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, एयर इंडिया-विस्तारा के सहयोग से दोनों कंपनियों को परिचालन दक्षता बढ़ाने और बेहतर ग्राहक अनुभव प्रदान करने पर भी काम करना होगा।

FY26 की वित्तीय रिपोर्टों से यह स्पष्ट होता है कि संयुक्त विमानन एंटिटी के प्रारंभिक वर्ष में नुकसान एक अस्थायी चरण हो सकता है, लेकिन इसे प्रबंधित करना सिंगापुर एयरलाइंस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनेगा। आगामी वर्षों में इस निवेश की वास्तविक सफलता और लाभप्रदता बाजार की प्रतिस्पर्धा, संचालन सुधार और नीति समर्थन जैसे कारकों पर निर्भर करेगी।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!