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इस वर्ष के मानसून से पहले IMD ने क्या घोषित किया? | विस्तार से समझें

What has the IMD announced ahead of this year’s monsoon? | Explained

मानसून मौसम की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो देश के बड़े हिस्से में वर्षा के रूप में जलापूर्ति करती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हाल ही में मानसून को लेकर अपनी तैयारियों और नई पहल के बारे में महत्वपूर्ण घोषणा की है, जो खासकर मानसून कोर जोन में शामिल उन 15 राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत का मानसून मौसम चार प्रमुख चरणों में बंटा हुआ है, और इन 15 राज्यों को मानसून कोर जोन माना जाता है क्योंकि यहां मानसून की प्रभावशीलता और सटीकता सबसे अधिक होती है। इसी कारण IMD ने ब्लॉक-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान को पहली बार लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे इस क्षेत्र के छोटे और मध्यम किसानों को बेहतर जानकारी मिल सके।

ब्लॉक-स्तरीय पूर्वानुमान क्यों महत्वपूर्ण है?

परंपरागत रूप से, मौसम पूर्वानुमान जिला या राज्य स्तर पर उपलब्ध होते थे, जो छोटे किसानों के लिए पर्याप्त उपयोगी नहीं होते थे। छोटे किसान जो ब्लॉक स्तर पर खेती करते हैं, उनके लिए यह जानकारी अधिक सटीक और उपयुक्त होनी चाहिए ताकि वे सही समय पर उचित निर्णय ले सकें। IMD की यह पहल किसानों की फसल सुरक्षा और बेहतर मानसून प्रबंधन के लिए कल्याणकारी साबित हो सकती है।

15 राज्यों का चयन क्यों हुआ?

ये 15 राज्य भारत के मानसून कोर जोन में आते हैं, जहां मानसून की सक्रियता अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक होता है। इसमें राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य भारत के कई हिस्से शामिल हैं। यहां गहन कृषि गतिविधि होने और मानसून की असामान्य गतिविधियों के कारण सटीक पूर्वानुमान की आवश्यकता सबसे ज्यादा होती है।

IMD की नई तकनीकी पहल

IMD ने नई तकनीकों, जैसे उच्च रेज़ोल्यूशन मौसम मॉडल और सैटेलाइट इमेजिंग का इस्तेमाल ब्लॉक-स्तर के पूर्वानुमान प्रस्तुत करने के लिए किया है। इससे न केवल समय पर सूचनाएं मिलती हैं, बल्कि मौसम में आने वाले बदलावों का व्यापक अनुमान भी लगाया जा सकता है। इसके साथ ही, किसानों और स्थानीय प्रशासन तक इन जानकारियों को पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी अधिक उपयोग किया जाएगा।

किसानों और क्षेत्रीय विकास पर प्रभाव

ब्लॉक-स्तरीय पूर्वानुमान से किसानों को सटीक जानकारी मिल सकेगी कि कब बारिश होगी, कब रोकने की जरूरत है, और कब फसल कटाई करनी है। इससे फसल बचाव की संभावनाएं बढ़ेंगी और आर्थिक नुकसान कम होगा। साथ ही, इससे जल प्रबंधन और फसल उत्पादन में भी सुधार सम्भव होगा। राज्यों के प्रशासन को भी त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जैसे कि बाढ़ नियंत्रण, राहत कार्य एवं जलस्रोत प्रबंधन।

IMD की इस पहल से भारत के कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में एक सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद है। इसके सफल क्रियान्वयन से मानसून कोर जोन के 15 राज्यों के किसान और पूरा देश बेहतर मौसम पूर्वानुमान और उसके प्रभावी उपयोग के माध्यम से समृद्धि की ओर बढ़ सकेंगे।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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