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डिजिटल युग की विरोधाभास को दर्शाती तमिल नाटक ‘थानिमाई’

Tamil play thanimAI portrays the paradox of the digital age

कोविड-19 महामारी के बाद डिजिटल तकनीक ने हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। हाल ही में कृष्णा गाना सभा के समर ड्रामा फेस्टिवल में मंचित तमिल नाटक ‘थानिमाई’ ने इस आधुनिक युग की जटिलताओं को उजागर किया है। यह नाटक यह दर्शाता है कि कैसे डिजिटल कनेक्शन के बावजूद एकाकीपन मनुष्य के जीवन में गहराई से व्याप्त है।

इस नाटक ने दर्शकों के बीच गहरी छाप छोड़ी है। संवाद, पात्रों की भावों की अभिव्यक्ति तथा कथा की प्रस्तुति ने तकनीक और अकेलेपन के बीच मौजूद विरोधाभास को बखूबी प्रस्तुत किया है। नाटक में यह स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल युग में आदमी भले ही इंटरनेट, सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ा हो, पर यह जुड़ाव अकेलापन कम करने में हमेशा कारगर साबित नहीं होता।

कृष्णा गाना सभा के अध्यक्ष ने बताया कि ‘थानिमाई’ नाटक को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह तकनीकी युग में व्यक्ति की आंतरिक चिंता और संघर्ष को सामने लाए। नाटककार ने दर्शाया है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली खुशियां असलियत में अकेलेपन के छिपे हुए भाव को नहीं मिटा पातीं।

समर ड्रामा फेस्टिवल में इस नाटक की प्रस्तुति ने लोगों को इस सोच पर विचार करने के लिए प्रेरित किया कि हमें डिजिटल संपर्क की सीमा को समझने और अपने निजी रिश्तों को सशक्त बनाने की आवश्यकता है। 21वीं सदी में तकनीक हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, लेकिन वास्तव में मनुष्य की भावनाओं को समझने और उनसे जुड़ने का प्रयास जरूरी है।

इस नाटक को दर्शाने वाली टीम ने भी बताया कि मंचन के दौरान दर्शकों की प्रतिक्रियाएं बहुत सकारात्मक रही। उन्होंने कहा कि इस नाटक ने यह संदेश दिया है कि असली संवाद और समझदारी किसी भी तकनीकी कनेक्शन से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। डिजिटल युग में हम जितने भी जुड़े हों, फिर भी अकेलापन एक बड़ा सामाजिक मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अंत में, ‘थानिमाई’ नाटक डिजिटल युग के उस द्वंद्व को समझने का एक अनूठा प्रयास है जहां आधुनिकता और परंपरा, कनेक्शन और अकेलापन साथ-साथ चलते हैं। यह नाटक युवाओं और समाज के हर वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि तकनीक के पीछे भी हमें मानवता को कैसे जीवित रखना है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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