दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

एस.पी.बी. के 80 वर्ष: कैसे एक आवाज़ ने हर मूड को आत्मसात किया

SPB at 80: How one voice captured every mood

4 जून, 2024 को महान गायक एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम की 80वीं जयंती मनाई जा रही है। भारतीय संगीत जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले एस.पी.बी. ने बिना किसी पारंपरिक प्रशिक्षण के अपनी आवाज़ के जादू से लाखों दिलों को छुआ। उनकी ग़ज़ब की संगीत यात्रा ने न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में श्रोताओं के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है।

एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम, जिन्हें प्यार से एस.पी.बी. कहा जाता है, का जन्म 4 जून 1946 को आंध्र प्रदेश में हुआ था। प्रारंभ से ही उनकी गायक बनने की लगन ने उन्हें संगीत की दुनिया में अद्भुत मुकाम दिलाया। उनकी आवाज़ की खासियत यह थी कि वे हर गीत को अपने अंदाज़ में ढाल देते थे, चाहे वह शास्त्रीय हो, पॉप या भावपूर्ण रोमांटिक धुन।

तात्कालिक संगीत पार्श्व में कई ऐसे कलाकार थे, लेकिन एस.पी.बी. की बहुमुखी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें एक मुकम्मल कलाकार बना दिया। उन्होंने दक्षिण भारत की भाषाओं के साथ-साथ हिंदी, मराठी, बंगाली और कई अन्य भाषाओं में भी गाया। उनके लगभग 40,000 गानों की गिनती करने वाले विश्व रिकॉर्ड ने उनकी प्रतिभा की प्रमाणिकता को सिद्ध किया है।

उनकी आवाज़ की मधुरता और लयबद्धता के कारण एस.पी.बी. अनेक पुरस्कारों और सम्मान से नवाजे गए। देश के सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री, पद्मभूषण, और पद्मविभूषण से सम्मानित होकर उन्होंने संगीत की दुनिया में अपने विश्वास और योगदान को एक नई ऊंचाई दी। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक, उनकी आवाज़ स्थापित रही है।

संगीत प्रेमी आज भी उनकी धुनों को सुनते और आनंदित होते हैं—उनकी हर स्वर लय और भाव के बहाने सुनने वालों के दिलों को छू जाती है। एस.पी.बी. की विरासत केवल उनकी आवाज़ तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी मेहनत, लगन और संगीत के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।

80वीं जयंती के अवसर पर, हम उन्हें नमन करते हैं और उनके गानों को याद कर सम्मानित करते हैं, जिन्होंने संगीत की दुनिया को एक नई दिशा दी। एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम की आवाज़ हमेशा हर मूड का प्रतिबिंब बनी रहेगी और संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेगी।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!