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केरल मानसून आगमन: भारत के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून की महत्ता

Kerala monsoon onset: Why southwest monsoon arrival matters for India

केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन ने देश के मौसम पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। मानसून की शुरुआत का सीधा ताल्लुक न केवल केरल के स्थानीय मौसम से है, बल्कि यह पूरे भारत की कृषि, खाद्य सुरक्षा, जल आपूर्ति और आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है।

हर साल जून की शुरुआत में जब मानसून के बादल केरल तट पर पहुँचते हैं, तो यह संकेत होता है कि पूरे देश में वर्षा का सिलसिला शुरू होने वाला है। यह चरण किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि अधिकांश भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है। मानसून की समय पर और पर्याप्त बारिश से ही फसलों की कटाई बेहतर होती है, जिससे खाद्य उत्पादन और बाजार दोनों प्रभावित होते हैं।

दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से देश के लगभग 70% भू-भाग में वर्षा होती है, जो खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, सोयाबीन और कपास की खेती के लिए आवश्यक है। कृषि क्षेत्र की जीडीपी (GDP) में मानसून का योगदान निर्धारक होता है। यदि मानसून देर से आता है या बारिश कम होती है तो किसानों को सूखा झेलना पड़ता है, जिससे उत्पादकता कम हो जाती है और खाद्य संकट उत्पन्न हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, मानसून की बारिश जल भंडारों को पुनः भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई जलाशय, नदियाँ और भूजल स्तर मानसून से प्रभावित होते हैं, जो पीने के पानी और सिंचाई के लिए आवश्यक है। जल संकट से बचाव और सतत विकास के लिए मानसून की अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का कहना है कि केरल मानसून का आगमन देश की कृषि योजना, आर्थिक नीतियों और जल प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है। इस वर्ष मानसून की शुरुआत में आई सही बारिश से किसानों को राहत मिलेगी और उत्पादन वृद्धि के संकेत मिलेंगे। वहीं, अगर मानसून अनियमित रहा तो सतर्कता और संक्रमण उपायों की आवश्यकता होगी।

इसलिए, केरल मानसून का आगमन न केवल एक मौसमी घटना है, बल्कि यह पूरे देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाला एक निर्णायक कारक है, जो देश की खाद्य सुरक्षा, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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