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कांग्रेस ने CBSE के तीन-भाषा सूत्र पर मोदी सरकार की ‘यू-टर्न’ की कड़ी निंदा की

Congress slams Modi govt. over CBSE’s ‘U-turn’ on three-language formula

नई दिल्ली। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से उनके पद से इस्तीफा देने की मांग की है। यह मांग उन्होंने हाल ही में X (पहले ट्विटर) पर एक बयान जारी करते हुए की। कांग्रेस ने सीबीएसई के तीन-भाषा सूत्र में बदलाव को मोदी सरकार द्वारा एक ‘यू-टर्न’ करार दिया है, जिससे शिक्षा नीति पर सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि एक बार फिर मोदी सरकार ने अपनी पूर्व घोषित नीति से पलटना शुरू कर दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीएसई की तीन-भाषा नीति में यह बदलाव छात्रों और अभिभावकों के हित के परुपरिक्षेप में नहीं है बल्कि राजनीतिक दबावों के कारण किया गया है।

कोविड-19 महामारी के बाद से शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की कई नीतिगत फैसलों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। तीन-भाषा सूत्र को लेकर यह विवाद राजधानी दिल्ली से लेकर देशभर के स्कूलों तक पहुंच चुका है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह नीति भारत की बहुभाषीयता का सम्मान करने की बजाय केंद्र सरकार की सांप्रदायिक और राजनैतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है।

धर्मेंद्र प्रधान, जिन्होंने इस बदलाव की घोषणा की थी, के कार्यालय से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भी इस बदलाव पर चिंता जताई है कि इससे भाषा शिक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

तीन-भाषा सूत्र भारत की शिक्षा नीतियों में एक महत्वपूर्ण अंग रहा है, जहां विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेज़ी के साथ-साथ उनकी स्थानीय भाषा भी सीखने का अवसर मिलता है। सरकार द्वारा इसमें फेरबदल को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच तीखी बहस चल रही है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जोर देकर कहा कि सरकार को छात्रों की भलाई और शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी नीति बनाने में प्राथमिकता देनी चाहिए न कि राजनीतिक एजेंडा के तहत बाध्यताओं को अपनाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर विपक्षी एकता भी देखने को मिल रही है और आगामी समय में संसद में इसे प्रमुखता से उठाया जाएगा।

इस मामले को लेकर शिक्षा जगत की कई संस्थाएं, अभिभावक संगठनों और छात्र समूहों ने भी अपनी राय व्यक्त की है। कईयों का मत है कि तीन-भाषा सूत्र को लेकर सरकार को पुनः विचार विमर्श करना होगा ताकि यह नीति सभी समुदायों और भाषाओं के लिए समान रूप से लाभकारी हो सके।

फिलहाल पूरे देश में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है और आने वाले दिनों में शिक्षा मंत्रालय से इस विषय पर और अधिक स्पष्टीकरण की उम्मीद की जा रही है। कांग्रेस की लगातार आलोचना और जनता के प्रश्नों के बीच मोदी सरकार के लिए यह चुनौती आगे बढ़ाने वाली दिख रही है कि वह शिक्षा क्षेत्र में स्थिर और प्रभावी नीतियां कैसे बनाएगी।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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