दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

सोशल मीडिया का सुपरस्टार आरक्षक हुआ “निलंबित” और “जुबानी जंग”पार्ट:2

 

 

शहडोल।

 

शुक्रवार दोपहर सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर,करोड़ो फालोअर के चहेते व स्टार वर्दीधारी आरक्षक विवेकानंद तिवारी के सस्पेंसन से माहौल गरमाया है सोशल मीडिया में उनके समर्थक ही नही बल्कि जो विवेकानंद की ईमानदारी और उनके कार्यशैली को जानता है वो भी इस कार्यवाही की आलोचना कर रहे हैं खासकर,आलोचना तब और तीखा हो जाता है जब आरक्षक उस कार्यवाही की खुद निंदा करे और बदले में पुलिस अधीक्षक कार्यालय से सफाई में प्रेस नोट जारी करना पड़े।


आपको बता दें कि पुलिस अधीक्षक के निर्देशन के आरक्षक विवेकानंद अकारण डयूटी न आना ड्यूटी टाइम में वीडियो और रील बनाने में सक्रिय होने जैसे कारण बताते हुए उन्हें ससस्पेंड किया गया है। जबकि विवेकानंद सोशल मीडिया में अपना कथन वायरल करते हुए लिखते हैं कि मेरे प्यारे शहडोल वासियों प्रिय स्नेही जनों मैं आप सबका ऋणी हूं जो अपार प्रेम एवं स्नेह आप सभी ने मुझे दिया मेरे सभी समर्थक जिन्होंने अपने विचारों से मेरे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया आप सभी को मेरा हृदय से आभार साथियों पिछले तीन महीने से मुझे रात को नींद ना आना, घबराहट बेचैनी होना, किसी सड़क दुर्घटना के बाद मन व्याकुल हो जाना, चिडचिडाहट यह सब मानसिक स्थिति मेरी हो गई है 19 मई 2026 को मैंने मोबाइल फोन के जरिए यातायात थाना को सूचना दी की मैं मेडिकल कॉलेज जा रहा हूं मेरा स्वास्थ्य सही नहीं है मैं तीन दिन और तीन रात सोया नहीं हूँ उस वक्त मेरा परिवार मेरी पत्नी और बच्चे अपने मामा के यहां गये थे मैं घर पर भी अकेला था मैं मेडिकल कॉलेज गया साइकैटरिस्ट को दिखाया एवं एक महीने की दवाई ली डॉक्टर ने मुझे एक सप्ताह के लिए रेस्ट करने की सलाह दी उन दवाइयां में नींद की दवाई भी सम्मिलित थी।

उक्त मेडिकल पर्ची को मैंने अपने थाना के व्हाट्सएप ग्रुप में जिसमें श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय भी जुड़े हुए 12:17 में दोपहर में भेज दिया था इसके बावजूद भी मेरी ड्यूटी 2:00 बजे से जय स्तंभ चौक पर लगाई गई मैंने तो सोचा कि मैं मेडिकल में हूं उसके बाद 5:00 बजे के लगभग मेरी ड्यूटी से गैर हाजिरी डाली गई मैं इन सब बातों को सार्वजनिक नहीं करना चाहता था मैं अपनी विभाग की गरिमा का पूरा सम्मान करता हूं किंतु मजबूर होकर मुझे आप सभी के समक्ष सारे दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ रहे हैं मैं बिना सूचना के गैर हाजिर नहीं हूं।
विवेकानंद की सस्पेंसन को लेकर फेसबुक इंस्टाग्राम व अन्य सोशल अकाउंट्स में इस कार्यवाही को गलत बता रहे हैं और अपनी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
जिसमे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आदेश के खिलाफ और विवेकानंद के सस्पेंसन के बीच सोशल मीडिया में एक जुबानी जंग जारी है।
हम अब मुद्दे पर आते हैं, वैसे जिले के थानों के ग्राफ उठा लीजिए जहां हत्या,उत्खनन,तस्करी और नशे की खेप से थाने गुलजार हैं और फाइलें भरी है, अखबारों के पन्ने रोजाना इन  थानों की कहानी बयां कर रहे हैं। जिस यातायात विभाग के ईमानदार कर्मचारी को सस्पेंड किया गया है उसी यातायात विभाग के मुखिया की कार्यवाही देख ली जाए जहा अवैध ओवरलोड रेत,खटारा बसें और अन्य वाहन बेखौफ सड़कों पर गड़गड़ाती हैं समय समय पर इसके एवज में वसूली की आहटें भी आती रही यातायात का ही एक पलटन रात में जरवाही गांव से एक रेत की गाड़ी पकड़कर ले जाता है और रास्ते मे सौदा करके छोड़ दिया जाता है।
कमियां तो थानों में बैठे तमाम जिम्मेदारों और प्रभारियों पर है किंतु सजा छोटे और ईमानदार कर्मचारी को,लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा की विवेकानंद भले ही अपने ड्यूटी कर्तव्यों का निर्वहन न किए हों किंतु वसूली के नाम पर आज तक किसी की चाय नही पी अगर इस एवज में कुछ लिया या दिया है तो लोगों को यातायात कानून की नसीहत और सलाह जिसके साक्ष्य आज उनके करोड़ो फालोअर हैं।
इस कार्यवाही पर राजेश खन्ना की फ़िल्म का एक गीत याद आ गया
जिसके बोल बहुत ही मार्मिक हैं 1979 में आई फिल्म ‘जनता हवलदार’ का गीत है…

“हमसे का भूल हुई जो ये सजा हमका मिली”

इस सदाबहार गाने को मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था, राजेश रोशन ने संगीतबद्ध किया था और इसे अनवर हुसैन ने अपनी आवाज़ दी थी।
इस गीत का भाव ही है कि कभी-कभी सच बोलने या हमेशा दूसरों की भलाई चाहने पर भी इंसान को बदले में दर्द और अकेलापन ही मिलता है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!