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टाटा स्टील का कहना है कि यू.के. प्लांट की कम-उत्सर्जन परियोजना में बिजली कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में देरी

Tata Steel says U.K. plant’s low-emission project facing delays in securing electricity access

टाटा स्टील की नई बिजली परियोजना में देरी, कनेक्टिविटी मुद्दे से जूझ रहा यू.के. प्लांट

टाटा स्टील के कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्त अधिकारी कौशिक चटर्जी ने बताया है कि कंपनी का यू.के. में स्थित प्लांट अपनी कम-उत्सर्जन (लो-इमीशन) परियोजना के लिए आवश्यक नई इलेक्ट्रिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में देरी का सामना कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में ईएसओ (ESO) और नेशनल ग्रिड (National Grid) के साथ काम जारी है, लेकिन नेशनल ग्रिड ने औपचारिक रूप से कनेक्टिविटी परियोजना में देरी की सूचना दी है।

टाटा स्टील इस परियोजना के माध्यम से अपने यू.के. प्लांट में नवीनतम पर्यावरण तकनीकों को अपनाकर कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रयासरत है। यह परियोजना न केवल कंपनी के पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करेगी, बल्कि यू.के. सरकार के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों के अनुरूप भी है। हालांकि, बिजली कनेक्टिविटी में हो रही देरी से परियोजना की संभावित उपलब्धि प्रभावित हो सकती है।

कौशिक चटर्जी ने कहा, ‘हम ईएसओ और नेशनल ग्रिड के साथ मिलकर नई बिजली अवसंरचना विकसित करने में लगे हुए हैं। लेकिन वर्तमान में नेशनल ग्रिड द्वारा परियोजना की कनेक्टिविटी में देरी की आधिकारिक जानकारी हमें प्राप्त हुई है।’

विश्लेषकों का मानना है कि बिजली कनेक्टिविटी के मुद्दे न केवल टाटा स्टील के इस विशेष प्लांट को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि पूरे यू.के. के औद्योगिक क्षेत्र में भी अक्षय ऊर्जा और कम-उत्सर्जन तकनीकों को अपनाने की गति को धीमा कर सकते हैं।

टाटा स्टील ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी पर्यावरणीय स्थिरता के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें शुद्ध कार्बन उत्सर्जन को कम करना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल शामिल है। कंपनी के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे देरी को जल्द से जल्द दूर करने के लिए सरकारी एजेंसियों और ग्रिड ऑपरेटरों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।

इस परियोजना की पूरी सफलता टाटा स्टील की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जो ग्लोबल मार्केट में कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने में मदद करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे दुनिया जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कड़े नियम लागू कर रही है, ऐसे समय में यह बिजली कनेक्टिविटी की समस्या एक चुनौती के रूप में उभरती है।

टाटा स्टील के इस कदम से उद्योग जगत में यह संदेश भी जाता है कि पर्यावरण हितैषी तकनीकों को अपनाने में जितनी तत्परता दिखानी होगी, उतनी ही समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। फिलहाल, कंपनी कनेक्टिविटी के मुद्दों को सुलझाने तथा परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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