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पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौडा का 25 जून को सार्वजनिक पद से सेवानिवृत्ति संभव

Former prime minister H.D. Deve Gowda could be coming to end of stint in public office on June 25

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता एच.डी. देवगौडा की राजनीतिक यात्रा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुकी है। 25 जून को उनके वर्तमान संसद सदस्य का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, और उनकी पार्टी के पास दोबारा उन्हें राज्यसभा सदन में भेजने के लिए आवश्यक संख्या नहीं है। यह स्थिति उनके लंबे सार्वजनिक करियर में एक संभावित समाप्ति की ओर संकेत करती है।

एच.डी. देवगौडा का राजनैतिक जनसेवा का सफर कई दशक पुराना है, जिसमें उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री का पद भी संभाला। हालांकि, हालिया राजनीतिक समीकरण उनके पक्ष में नहीं हैं। उनके दल, जद(एस), के पास अब ऐसे सदस्य नहीं हैं जो उन्हें राज्यसभा में वापस भेजने के लिए पर्याप्त वोट दे सकें।

राज्यसभा चुनाव में सदस्य निर्वाचित करने के लिए पार्टी के पास विधायकों की संख्या महत्वपूर्ण होती है। जद(एस) के वर्तमान विधानसभा में सीटों की संख्या कम होने के कारण देवगौडा का पुनः चुनाव मुश्किल लग रहा है। मुद्दा यह है कि जून समाप्ति के बाद उनका राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो जाएगी, जिससे उनकी संसद में सक्रिय भूमिका सीमित हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बदलाव क्षेत्रीय राजनीति के नए समीकरण और पार्टी के आंतरिक विकास के कारण हुआ है। जद(एस) ने हाल के दिनों में रणनीति और गठजोड़ के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, लेकिन ये पालन में कठिन साबित हुए।

एच.डी. देवगौडा के रूप में एक अनुभवी और सम्मानित नेता का सार्वजनिक सेवा से संन्यास या वापसी की संभावना राजनीतिक दृष्टि से महत्व रखती है। उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता इस बदलाव को बड़े नजदीक से देख रहे हैं। वहीं विपक्ष के लिए भी यह एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।

वर्तमान राजनीतिक माहौल में देवगौडा की भूमिका और भविष्य के विशेष महत्व के साथ देखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि सार्वजनिक सेवा से हटना कभी भी आसान निर्णय नहीं होता, लेकिन उन्होंने जो योगदान दिया है वह हमेशा याद रखा जाएगा।

इस परिस्थिति ने जद(एस) और कर्नाटक की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है कि वरिष्ठ नेताओं के बिना पार्टी का मार्ग कैसे होगा और आगामी चुनावों में उनकी रणनीति क्या होगी।

संक्षेप में, 25 जून के बाद एच.डी. देवगौडा की सार्वजनिक सेवा में लगातार सक्रिय रहना या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से दूर होने का निर्णय राजनीति की दिशा बदल सकता है। उनके समर्थकों के लिए यह एक गहरा भावनात्मक क्षण होगा।

इस पूरे परिप्रेक्ष्य में यह स्पष्ट है कि देवगौडा का राजनीतिक सफर आने वाले दिनों में नया मोड़ ले सकता है, जो न केवल उनकी पार्टी बल्कि देश की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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