दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर का फैसला 2017-18 के 11 AIADMK विधायकों के अनुभव की याद दिलाता है

Tamil Nadu Assembly Speaker  J.C.D.  Prabhakar’s decision marks a throwback to the experience of 11 AIADMK MLAs in 2017-18

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा अध्‍यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर के हालिया फैसले ने 2017-18 में 11 AIADMK विधायकों की स्थिति को फिर से ध्यान में ला दिया है, जब वे बहिष्कार एवं अयोग्यता के मुद्दे से जूझ रहे थे। उस समय विधायकों को अयोग्यता की संभावनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष पी. धनपाल ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिससे इस मामले में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।

2017 में, 11 AIADMK विधायक, जिनका पार्टी नेतृत्व से विवाद था, को बहिष्कार का सामना करना पड़ा था और संभावित रूप से अयोग्यता की प्रक्रिया में डाला गया था। हालांकि, उस समय के अध्यक्ष पी. धनपाल ने उनकी अयोग्यता के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने से बचा, जिससे विधायकों की स्थिति सुरक्षित रही। इस मामले ने राजनीतिक हलकों में बड़े असर छोड़े और विधानसभा की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए।

केंदा कार्रवाई न होने के कारण मामला मद्रास उच्च न्यायालय तक पहुंचा था, जहां अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के कार्यवाही न करने के फैसले को बरकरार रखा और विधायकों के खिलाफ कार्रवाई को खारिज कर दिया। इस फैसले ने विधायकों की समस्या को और जटिलता से बचाया और राजनीतिक गतिरोध को कम किया।

विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर का वर्तमान निर्णय भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है कि वे कैसे विधायकों के मामलों में प्रतिक्रिया देते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक ऐसा उदाहरण है जहाँ विधायकों के खिलाफ कार्रवाई के मामलों में अध्यक्ष की भूमिका निर्णायक होती है और उनका रवैया राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

तमिलनाडु विधानसभा में यह मामला राजनीतिक दलों के बीच संतुलन बनाए रखने और विधायकों के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा अध्यक्ष के फैसले से राजनीतिक माहौल प्रभावित होता है, जिसे समझना आवश्यक है ताकि लोकतंत्र की प्रक्रिया मजबूती से चल सके।

इस प्रकार, 2017-18 के 11 AIADMK विधायकों के अनुभव से सीख लेते हुए, तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर का निर्णय न केवल संसद की कार्यप्रणाली पर प्रभाव डालता है, बल्कि राजनीतिक स्थिरता और विधायकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की जिम्मेदारी भी प्रदर्शित करता है।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!