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जहाँ भारतीय समुद्री यात्रियों की सुरक्षा दांव पर है

Where Indian seafarers’ safety is at stake

भारतीय समुद्री यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है क्योंकि वे ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जहाँ वाणिज्यिक समुद्री जहाज भू-राजनीतिक संघर्षों में उलझे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कूटनीतिक वार्तालाप समस्याओं का समाधान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और इन नौसैनिक कर्मियों को युद्ध जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने के लिए पूरी जानकारी और उनकी सहमति के बिना बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठनों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जहाज चालक दल को उन खतरों के बारे में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए जो संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में नौकायन करते समय हो सकते हैं। भू-राजनीतिक तनाव के कारण, कई यात्राओं में नौसैनिक दल को युद्ध-क्षेत्र के आस पास से गुजरना पड़ रहा है, जहां माइन, समुद्री डकैती और सैन्य हमले जैसे जोखिम बढ़ गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन जोखिमों की जानकारी बिना यात्रियों की पूरी सहमति के छुपाने या उन्हें मास्को या अन्य जोखिम भरे क्षेत्र में भेजने पर गंभीर सवाल उठते हैं। युद्ध जोखिम वाले क्षेत्रों में नौकायन करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के संदर्भ में पारदर्शिता और उचित प्रोटोकॉल लागू करने की सख्त जरूरत है।

भारत सरकार और समुद्री व्यापारिक संगठन इस समस्या को गंभीरता से देख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भारतीय समुद्री यात्रियों को जोखिम की पूरी समझ हो और उन्हें अनिवार्य रूप से जोखिम वाले मार्गों पर तैनात न किया जाए यदि वे सहमति नहीं देते। साथ ही, הנा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और द्विपक्षीय कूटनीति को मजबूत कर समुद्री सुरक्षा बढ़ाने का आग्रह किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत, किसी भी जहाज के चालक दल को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण प्रदान करना अनिवार्य है। ऐसे क्षेत्रों में जहाजों को भेजने से पहले, नियोक्ताओं और माल मालिकों को कर्मचारियों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्राथमिकता देनी होगी।

समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे समुद्री राष्ट्रों को अपने यात्रियों की सुरक्षा तथा अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत आवाज़ उठानी चाहिए। इसके अलावा, तकनीकी और सुरक्षा उपायों में वृद्धि कर युद्ध-क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

अतः यह आवश्यक है कि इन जोखिम भरे क्षेत्रों से गुजरने वाले भारतीय समुद्री यात्रियों को पूरी जानकारी प्रदान की जाए और उनकी सहमति के बिना उन्हें इस तरह के खतरों में न डाला जाए, जिससे उनकी जान और भविष्य सुरक्षित रहे।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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