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पढ़ने के कई रास्ते: दृष्टि से डिस्लेक्सिया के रहस्यों का खुलासा

Many roads to reading: what vision can reveal about dyslexia

विभिन्न भाषाओं के बच्चों के लिए स्क्रीनिंग परीक्षण अक्सर दो तरह की गलती कर सकते हैं: वे उन बच्चों को अधिक पहचान देते हैं जिनके कम अंक असल में अक्षमता की वजह से नहीं बल्कि सीमित अनुभव के कारण होते हैं, और वे उन बच्चों की पहचान कम करते हैं जो बोलने में सक्षम होते हैं लेकिन तेजी से दृष्टि से जानकारी ग्रहण करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

भाषा-स्वतंत्र मापदंड न केवल तकनीकी प्रगति हैं, बल्कि यह एक समानता का मुद्दा भी है। जिससे सुनिश्चित होता है कि सभी बच्चों को उचित मदद मिले, चाहे वे किसी भी भाषा या पृष्ठभूमि से हों।

शिक्षा क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण है कि स्क्रीनिंग उपकरण ऐसे हों जो भाषा की सीमाओं से परे जाकर बच्चों की वास्तविक क्षमता और चुनौतियों को पहचान सकें। पारंपरिक भाषा आधारित परीक्षण सीमित अनुभव वाले या बहुभाषी बच्चों के लिए भ्रामक हो सकते हैं, जिससे या तो उन्हें गलत रूप से अक्षमता के दायरे में डाला जाता है या उनकी समस्याएं अनदेखी रह जाती हैं।

दृष्टि तेजी से जानकारी को कोडित करने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, खासकर प्रिंट आधारित पढ़ाई में। बच्चों की क्षमता को समझने के लिए ऐसे उपकरण विकसित किए जा रहे हैं जो भाषा के प्रभाव से मुक्त हों और सीधे उनके दृश्य प्रसंस्करण कौशल को आंकें। इससे न केवल शिक्षकों को सही जानकारी मिलती है बल्कि बच्चों को भी सही समय पर उचित सहायता मिलती है।

शिक्षा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि भाषा-स्वतंत्र परीक्षण की मदद से हम पढ़ाई में आने वाली असमानताओं को कम कर सकते हैं और प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार समाधान प्रदान कर सकते हैं। इसके साथ ही, इससे शिक्षा प्रणाली को और समावेशी बनाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है।

अतः यह स्पष्ट है कि भाषा-स्वतंत्र स्क्रीनिंग न केवल तकनीकी नवाचार हैं, बल्कि ये अकादमिक और सामाजिक न्याय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन्हें शिक्षा नीति का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए ताकि सभी बच्चों को समान अवसर और गुणवत्ता वाली शिक्षा दी जा सके।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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