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भारत के मानसून के लिए एक ‘सुपर’ एल नीनो का क्या मतलब होगा

What a ‘super’ El Niño would mean for India’s monsoon

नई दिल्ली। भारत में मानसून और कृषि पर प्रभाव डालने वाले महत्वपूर्ण मौसमीय घटनाक्रमों में एल नीनो एक प्रमुख भूमिका निभाता है। 1950 के बाद के वर्षों में जब भी एल नीनो की अवस्था बनी, तब से भारतीय मौसम विभाग (IMD) के दीर्घकालिक वर्षा आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि लगभग पच्चीस वर्षों में करीब 15 वर्षों में मानसून सामान्य से कम रहा। इनमें से लगभग दस वर्ष तो मानसून की कमी इतनी अधिक रही कि उन्हें पूर्णतः वर्षा अभाव वाले वर्ष कहा गया।

यह तथ्य इस बात की गवाही देता है कि एल नीनो सनदें मानसून पर करीब तीन में से दो बार नकारात्मक प्रभाव डालता है। ऐसे आंकड़े खाद्य उत्पादकता, फसल योजना और वित्तीय नीतियों पर सीधा असर डालते हैं। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के देश के लिए मानसून की यह अनियमितता चिंता का कारण बनती है, क्योंकि वर्षा की कमी से फसलों का उत्पादन घटता है और खाद्य सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न उत्पन्न होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब ‘सुपर’ एल नीनो उत्पन्न होता है, तो यह सामान्य एल नीनो की तुलना में अधिक तीव्र और लंबी अवधि तक जारी रहता है। ऐसा होने पर मानसून और भी अधिक प्रभावित होता है, जिससे सूखे की संभावनाएं और भी बढ़ जाती हैं। इसलिए मौसम विभाग ने सतर्कता और सटीक पूर्वानुमान के लिए अनुसंधान को बढ़ावा दिया है, ताकि सरकारों को समय पर आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने में मदद मिल सके।

एल नीनो की यह ताकतें केवल मानसून की मात्रा को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि इसके वितरण और समय सीमा पर भी प्रभाव डालती हैं। इस प्रकार, बारिश की अनियमितता खेती के लिए चुनौती बन जाती है। आगामी वर्षों में भी मानसून की भविष्यवाणी में एल नीनो की भूमिका को समझना और उसका विश्लेषण करना कृषि और अर्थव्यवस्था के समग्र प्रबंधन के लिए आवश्यक होगा।

सरकार और मौसम विभाग द्वारा इस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि समय-समय पर किसानों और संबंधित एजेंसियों को उपयुक्त दिशा-निर्देश दिए जा सकें। साथ ही, खाद्य भंडारण और आयात-निर्यात नीतियों में परिवर्तन लाकर संभावित खाद्य संकट से बचाव किया जा सके।

अतः यह स्पष्ट है कि ‘सुपर’ एल नीनो भारत के मानसून पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, जो कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए इसकी निगरानी, वैज्ञानिक अध्ययन और प्रभावी योजना बनाना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शुमार है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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