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एनईपी के छह साल बाद भी स्कूल छात्रों के लिए लचीली विषय चयन का सपना अधूरा

Six years after NEP, flexible subject choices still a dream for school students

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के लागू होने के छह वर्ष बीत जाने के बाद भी स्कूलों में छात्रों को लचीले विषय चुनने की सुविधा प्राप्त नहीं हो पाई है। यह सुविधा, जो छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चयन करने का अवसर देती है, अभी भी अधिकांश सरकारी और निजी स्कूलों में सिर्फ एक आदर्श के रूप में बनी हुई है।

एनईपी 2020 में शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें विषयों के चयन में अधिक स्वतंत्रता, बहुआयामी विकास और कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया था। लेकिन, शिक्षण संस्थानों की तैयारियों और व्यवस्थागत जटिलताओं के कारण यह कदम अपेक्षित गति से लागू नहीं हो सका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लचीले विषय चयन की व्यवस्था न केवल छात्रों की रुचि बढ़ाएगी, बल्कि उनकी शैक्षणिक सफलता और करियर विकास के लिए भी आवश्यक है। हालांकि, फिलहाल स्कूलों में कई बार विषयों की सीमित विकल्पता, अध्यापक की कमी और पाठ्यक्रम के अनुशासनात्मक ढांचे की वजह से विकल्प सीमित रह जाते हैं।

सरकारी स्तर पर शिक्षा विभाग इस दिशा में कई पहल कर रहा है, लेकिन समाधान की बजाय चुनौतियों का सामना ज्यादा हो रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि शिक्षा नीति के प्रावधान केवल कागजों तक सीमित नहीं रह सकते, बल्कि उनका व्यवहारिक और प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।

शिक्षकों और अभिभावकों की राय में, यदि विषय चयन अधिक लचीला होगा तो छात्र अपनी रुचि के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे और उनकी प्रतिभा भी सही दिशा में विकसित होगी। वर्तमान में बोर्ड परीक्षाओं और निर्धारित पाठ्यक्रम के दबाव में छात्रों को अपनी पसंद के विषय चुनना संभव नहीं होता।

इस मुद्दे पर सरकार का जवाब है कि वे राज्यों और स्कूल प्रबंधन के साथ मिलकर इस प्रणाली को सुधारने के लिए रणनीतियाँ बना रहे हैं। साथ ही डिजिटल शिक्षण संसाधनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने की योजना है, ताकि विषय चयन में सुविधा और वैयक्तिकता लाई जा सके।

वहीं, अभिभावक और विद्यार्थी संगठन भी इस मामले को शिक्षा सुधारों की प्राथमिकता में रखने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षा केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के बहुआयामी विकास का मार्ग होनी चाहिए।

इस प्रकार, एनईपी के छह वर्षों के बाद भी स्कूलों में लचीले विषय विकल्प उपलब्ध न होना एक गंभीर शिक्षा संकट की ओर इशारा करता है। यह आवश्यक है कि नीति बनाने वाले और लागू करने वाले मिलकर इस बाधा को दूर करें और विद्यार्थियों के हित में त्वरित व प्रभावी कदम उठाएं।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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