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कलात्मक प्रतिरोध: आर्टिविज्म की अनोखी कहानी

The artful resistance of Artivism

आज के समय में जब सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे तेजी से उभर रहे हैं, तब कला और सक्रियता ने एक नया रूप अख्तियार किया है, जिसे आर्टिविज्म (Artivism) कहा जाता है। इस शब्द का निर्माण ‘आर्ट’ और ‘एक्टिविज्म’ से हुआ है, जो दर्शाता है कि कला का उपयोग सामाजिक बदलाव के लिए एक माध्यम के रूप में किया जा रहा है।

आर्टिविज्म केवल एक कला रूप नहीं है बल्कि यह एक सक्रिय आंदोलन भी है, जो दर्शाता है कि कलाकार अपने काम के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रहे हैं। कलाकार सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डालते हैं, जैसे कि पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार, लैंगिक समानता और अन्य कई महत्वपूर्ण विषय, जिन्हें शब्दों के बजाय अपने कला के माध्यम से व्यक्त करते हैं।

भारतीय संदर्भ में आर्टिविज्म ने विभिन्न रूपों को अपनाया है। यहां के कलाकार निजी और सार्वजनिक स्थानों पर स्थापना और प्रदर्शनी के द्वारा जागरूकता फैलाते हैं। उदाहरण के तौर पर, स्ट्रीट आर्ट और पेंटिंग के जरिए लोग सामाजिक भेदभाव, भ्रष्टाचार और अन्य समस्याओं पर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

वास्तव में, आर्टिविज्म के जरिए कला को सिर्फ मनोरंजन या सौंदर्य की दृष्टि से देखा जाना बंद होकर यह एक शक्तिशाली बदलाव की आवाज बनती जा रही है। यह लोगों को सोचने, सवाल उठाने और सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करने का काम करता है।

सारांश में कहा जाए तो आर्टिविज्म एक ऐसी क्रियाशील कला है जो दर्शाती है कि कला और सक्रियता का मेल किस प्रकार समाज के लिए नई उम्मीदों और दिशा की नींव रख सकता है। यह हमें याद दिलाता है कि कला केवल दीवारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे समाज के बदलाव का आदर्श माध्यम बनाया जा सकता है।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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