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“जिस तहसील को सीमांकन सिखाना था, उसने अपनी ही सरहद मिटा दी

 

सीमांकन करने वाला महकमा खुद अपनी सीमा खो बैठा”

 

शहडोल/बुढ़ार….विनय मिश्रा

एक कहावत है जो श्रीराम के जमाने से चली आ रही है कि “घर का भेदी लंका ढाए”हम उस लंका की बात नही कर रहे हैं बल्कि तहसील में बैठे भेदियो और रिश्वतखोर उन जिम्मेदारों की बात कर रहे हैं जो अपने ही भूमि को आज निचोड़ खाए।कितने कमाल की बात है कि औरो का तरमीम, सीमांकन, पट्टा और सरहद तय करने वाला राजस्व महकमा अपने ही कार्यालय को आज तक सुरक्षित नही कर पाया और न ही कार्यालय का सरहद तय हुआ।

कितने जिम्मेदार आए और गए किन्तु तहसील कार्यालय की भूमि धीरे धीरे माफियाओ ने इन्ही तहसील के जिम्मेदारों से मिलकर हथिया ली कहीं मकान बने हैं कहीं दुकान तो कहीं शिक्षण संस्थान हद तो तब हो गई जब खसरा क्रमांक 127 जो कुछ हेक्टेयर और एकड़ो में हुआ करती थी आज चंद डिसमिलो में सिमट गई जानकारी के अनुसार शिक्षण सन्स्थान पर कार्यवाही हुई थी

वो आज शनिवार-इतवार को अफसरो को धोखे में रख तहसील की भूमि पर पुनः काबिज हो रहा है तो तहसील के पीछे सरकारी हिस्से

 

की भूमि में कुछ रसूखदारों ने बाउन्ड्री बनाकर गेट तान दिया कितने आश्चर्य की बात है कि ये सब तहसील की नजर के सामने दिन के उजाले में होता रहा और राजस्व महकमा सोता रहा इसी भूमि के कुछ हिस्से को तात्कालिक कलेक्टर ने तुड़वाया था फिर आज के दौर में वह निजी कैसे हो गया सवाल बड़ा सन्देहास्पद हैं और संदेह के घेरे में है तात्कालिक कलेक्टर की कार्यवाही और वर्तमान प्रशासन और तहसीलदार की चुप्पी।

अगर  2021 में हुई कार्यवाही के वो दस्तावेज खंगाले जाए तो तहसील कार्यालय को अंदाजा लग जाएगा कि तहसील के किस भूमि पर कितना अतिक्रमण था और क्या-क्या कार्यवाही हुई थी हलाकि उस दौर में अतिक्रमण के खिलाफ एक मुहिम ही शुरू हुई थी किंतु वर्तमान प्रशासन और राजस्व महकमे से अब उम्मीद भी नही की किसी प्रकार की कार्यवाही कहीं भी अतिक्रमण के खिलाफ दिख जाए ।

कहने को तो तहसील बुढ़ार में एसडीएम बैठने का निर्देश भी जारी हुआ था किंतु उसे भी यहां के रसूखदारों ने किसी बीते हुए समय की तरह भुला दिया और जनता की नजर ओझल हो गया वह एसडीएम कार्यालय का आदेश।

आज तहसील बुढ़ार चारागाह हो चुका है जहाँ हर शाम माफ़ियाओं की महफ़िल सजती है चर्चा है कि तहसील के सारे रुके काम या ब्लैक एंड व्हाइट दस्तावेजों का खाका इसी शाम के दौरान तैयार किया जाता है और उसके एवज में महकमे की शाम रंगीन होती है और माफियाओं को मिलता है शासकीय भूमि और निजी कामो का इनाम।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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