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मई 2026 में आरबीआई ने दरों में कटौती की ट्रांसमिशन में नरमी

Rate cuts transmission moderated in May 2026: RBI

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026: भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने मई 2026 में ब्याज दरों में कटौती के संकेतन को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है, जिसमें दर कटौती का ट्रांसमिशन अपेक्षित से अधिक धीमा रहने की संभावना जताई जा रही है। यह विकास उस समय हुआ है, जब पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई ने मौद्रिक नीति में कई बदलाव किए हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, मई 2022 से जनवरी 2025 के बीच, आरबीआई ने रेपो दर में कुल 250 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना था। इस अवधि में कड़ी मौद्रिक नीति अपनाई गई, जो पैसों की उपलब्धता को सीमित करने और मांग पर नियंत्रण रखने की रणनीति थी।

हालांकि, फरवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच, आरबीआई ने रेपो दर में 85 बेसिस पॉइंट की कटौती की, जिससे ब्याज दरों में आंशिक राहत मिली। इस कदम का मकसद आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना और निवेश को बढ़ावा देना था। लेकिन इस कटौती का पूर्ण प्रभाव मौद्रिक नीति की दिशा में अपेक्षित नहीं दिख रहा है क्योंकि मुद्रास्फीति अभी भी नियंत्रण में पूरी तरह नहीं आई है और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता बनी हुई है।

आरबीआई द्वारा हाल ही में जारी किए गए बयान में भी यह बात स्पष्ट की गई है कि मौद्रिक नीति के संकेतों का आर्थिक स्तर पर पूर्ण प्रभाव आने में समय लगेगा। इस संदर्भ में, मई 2026 में दरों में कटौती की घोषणा के बावजूद, उसकी ट्रांसमिशन को नरम होकर मध्यम स्तर पर आने की संभावना है।

भारतीय आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान में दुनिया भर के मुख्य बाजारों में मौद्रिक नीति में बदलाव, साथ ही अनिश्चित वैश्विक वित्तीय हालात, भारतीय बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए, आरबीआई की दरों में कमी का प्रभाव धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों पर दिखेगा।

इस बीच, उपभोक्ता एवं उद्योग जगत के लिए यह एक संकेत है कि ब्याज दरों में कुछ राहत मिलने के बावजूद सावधानी बरतनी आवश्यक है। निवेशक और व्यवसाय नीति के स्थिरता के प्रति सतर्क हैं और बाजार की स्थिति को समझने के लिए और समय लेना चाहते हैं।

निष्कर्षतः, मई 2026 में आरबीआई की दरों में कटौती का स्वागत तो किया गया है, लेकिन उसका प्रभाव पूरी तरह से बाजार में आने के लिए और कुछ समय चाहिए। मौद्रिक नीति के ट्रांसमिशन में इस तरह की नरमी आर्थिक संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक भी कही जा सकती है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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