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एक सर्जन का समाचार पत्रकारों के लिए विरोधाभासी पाठ: खबरों से बच निकलने का अनोखा तरीका

A surgeon’s paradoxical lesson for journalists to survive the news

समाचार जगत में काम करने वाले पत्रकारों के लिए खबरों से दूरी बनाना एक मुश्किल काम बन चुका है। हर पल समाचार की आपाधापी में उलझे पत्रकारों को लगता है कि वे कभी खबरों की चपेट से बाहर नहीं निकल पाते। वहीं, एक सर्जन द्वारा दी गई सीख से यह समझने का एक नया नजरिया सामने आया है, जो पत्रकारों के लिए समाचार से सुरक्षित जगह पाने का मार्ग सुझाता है।

आधुनिक दौर में पत्रकार लगातार खबरों के दबाव में रहते हैं। ना सिर्फ खबरों का संग्रहण, बल्कि उन्हें सही समय पर सही अंदाज में प्रस्तुत करना पत्रकारिता की बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में पत्रकारों का मानना है कि खबरों से कुछ समय के लिए दूर रह पाना, मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है, पर यह आसान नहीं होता।

दिलचस्प बात यह है कि एक अनुभवी सर्जन ने पत्रकारों को सलाह दी है कि वे खबरों से ‘सामयिक दूरी’ बना कर अपनी मानसिक स्थिति को बेहतर रख सकते हैं। सर्जन के अनुसार, वैसे ही जैसे एक डॉक्टर मरीजों की समस्याओं में गहराई से डूबे बिना उनका इलाज करता है, वैसे ही पत्रकारों को भी समाचार की व्यावसायिकता बनाए रखनी चाहिए।

इस विचारधारा में पत्रकारों को एक रूपक के तौर पर पेश किया गया है। सर्जन कहते हैं कि खबरों को व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए क्योंकि इससे उनकी मानसिकता प्रभावित हो सकती है। इसके बजाय, खबरों को एक पेशेवर जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए और खुद को उसमें पूरी तरह डूबने से बचाना चाहिए।

सूचना के इस युग में खबरों का दबाव हमेशा बना रहता है, पर इस सुझाव से पत्रकार खुद की देखभाल कर सकते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से समाचार क्षेत्र में कार्यरत लोगों को नियमित अंतराल पर ब्रेक लेने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पत्रकारों को अपने काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना अत्यंत जरूरी है। इस सर्जन की सीख पत्रकारिता पेशे में मनोवैज्ञानिक तनाव को कम करने के लिए नई राह खोल सकती है।

निष्कर्षतः, इस सर्जन की विरोधाभासी सीख पत्रकारों की दुनिया में नवीनता लेकर आई है। वह एक ऐसा सूत्र प्रस्तुत करती है, जो पत्रकारों को समाचारों से दूर रहकर भी उन्हें मैनेज करने की कला सिखाता है। यही कारण है कि यह परामर्श पत्रकारिता एवं समाचार क्षेत्र में क्रांति ला सकता है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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