दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

जंगल में स्वागत है मूवी रिव्यू: अक्षय कुमार और जॉनी लीवर ने खोए हुए सिनेमाई कथानक को बचाया

‘Welcome To The Jungle’ movie review: Akshay Kumar and Johny Lever salvage a script lost in the woods

हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म “जंगल में स्वागत है” का निर्देशन अहमद खान ने किया है, जिसमें अक्षय कुमार और जॉनी लीवर की मुख्य भूमिका है। यह फिल्म एक मेटा-कॉमेडी है जो दर्शकों से पूर्ण बौद्धिक समर्पण की उम्मीद करती है, लेकिन दुर्भाग्यवश निर्देशक अहमद खान कहानी के जंगल में खो जाते नजर आते हैं।

फिल्म की कहानी एक सवाल उठाती है कि कैसे मनोरंजन और हास्य को संतुलित किया जाए, लेकिन पटकथा के कमजोर होने के कारण यह प्रयास कुछ हद तक दब जाता है। अक्षय कुमार की आंखों में चमक और जॉनी लीवर की कॉमिक टाइमिंग ने फिल्म को कहीं न कहीं बचाने का काम किया है। दोनों कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं में जान डालने की पूरी कोशिश की, जिससे कुछ सेक्वेंस में हास्य उत्पन्न हुआ, हालांकि यह पर्याप्त नहीं था।

फिल्म में कई मजेदार पल हैं जो दर्शकों को हँसाते हैं, लेकिन गहरे अर्थ या सशक्त कहानी की कमी इसे औसत बना देती है। संवाद हल्के-फुल्के हैं, जो कुछ जगह मनोरंजक लगे, परन्तु पटकथा की असमानता और कहानी में तर्क की कमी दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।

तकनीकी पहलुओं की बात करें तो सिनेमैटोग्राफी और संगीत ठीक-ठाक हैं, लेकिन वे कहानी को जोड़ने में असमर्थ हैं। निर्देशन में एक निश्चित दिशा का अभाव साफ नजर आता है, जिससे फिल्म में कहीं न कहीं भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

कुल मिलाकर, “जंगल में स्वागत है” एक ऐसी फिल्म है जो अपने विषय में गहराई से उतरने की कोशिश करती है, लेकिन पटकथा और निर्देशन की कमजोरियों के कारण वह संदेश कमजोर पड़ जाता है। हालांकि अक्षय कुमार और जॉनी लीवर की परफॉर्मेंस देखने लायक है, फिर भी यह फिल्म उन दर्शकों के लिए उपयुक्त नहीं है जो सशक्त कथानक और बेहतर फिल्म निर्माण की उम्मीद करते हैं।

इस फिल्म को देखने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि यह मेटा-कॉमेडी शैली की है, जो खुले दिल से मनोरंजन पर ध्यान देती है, न कि गहन कहानी पर। इसलिए अगर आप हल्की-फुल्की कॉमेडी के मूड में हैं तो “जंगल में स्वागत है” को देख सकते हैं, लेकिन अधिक उम्मीदें ना रखें।

इस प्रकार, निर्देशक अहमद खान का यह प्रयास कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया, लेकिन फिल्मों में नए प्रयोगों के लिए यह एक प्रयास जरूर माना जा सकता है।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!