दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

विजयिनी सतपथि का ‘त्रिकाय’ लिंग आधारित देह की पड़ताल करता है

Bijayini Satpathy’s Trikāyā questions the gendered body

मुंबई के G5A फाउंडेशन फॉर कंटेम्पररी कल्चर में आयोजित “इन रेसिडेंसी” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया, ओडिसी नृत्य की प्रमुख कलाकार विजयिनी सतपथि का नवीनतम सोलो प्रदर्शन “त्रिकाय” को महाभारत के तीन प्रमुख प्रसंगों के माध्यम से लिंग, पहचान और शास्त्रीय कला के अभिव्यक्ति संभावनाओं की जाँच के तौर पर देखा जा रहा है।

इस प्रस्तुति में महाभारत की ऐसी कहानियाँ चुनी गई हैं, जो परंपरागत लिंग भूमिकाओं को चुनौती देती हैं और समाज में पुरुष और महिला की परिभाषा को नए सिरे से समझने पर मजबूर करती हैं। विजयिनी ने शास्त्रीय ओडिसी नृत्य की भाषा का इस्तेमाल करते हुए इन विषयों को संवेदनशीलता और गहराई के साथ मंचित किया है।

कार्यक्रम में दर्शकों ने न केवल नृत्य का आनंद लिया बल्कि सामाजिक विचार-विमर्श का भी हिस्सा बने। प्रस्तुति ने यह सवाल उठाया कि किस प्रकार शारीरिक अभिव्यक्ति के माध्यम से नृत्य कला सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे की सीमाओं को पार कर सकती है।

विजयिनी सतपथि, जो अपने उत्कृष्ट नृत्य कौशल और गहन शोध के लिए जानी जाती हैं, इस परियोजना के जरिये लिंग आधारित पारंपरिक धारणाओं को चुनौती देने का प्रयास कर रही हैं। महाभारत के तीन एपिसोड का चयन भी यही दर्शाता है कि नृत्य के द्वारा बड़े सामाजिक विषयों पर प्रकाश डाला जा सकता है।

G5A Foundation के आयोजकों ने इस कार्यक्रम को बेहद सफल बताया और कहा कि इस तरह के आयोजन संस्कृति और कला के क्षेत्र में नई सोच और बहस को बढ़ावा देते हैं। इस पहल से न केवल कलाकारों को मंच मिलता है बल्कि दर्शकों को भी सोचने का नया नजरिया मिलता है।

विजयिनी सतपथि की यह प्रस्तुति न केवल शास्त्रीय नृत्य के प्रेमियों के लिए बल्कि सामाजिक और लिंग आधारित सवालों में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण बनी है। यह प्रस्तुति भारत के सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक जटिलताओं को नृत्य के माध्‍यम से संवादात्मक रूप से सामने लाने का एक उदाहरण है।

इस प्रकार, “त्रिकाय” नृत्य की परंपरा और समकालीन सामाजिक मुद्दों को जोड़ते हुए लिंग, पहचान और कला की नई खोज को प्रोत्साहित करता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय सांस्कृतिक दृश्य में एक अपडेटेड और महत्वपूर्ण चर्चा जोड़ता है, जो आने वाले समय में और भी गहरे विमर्शों को जन्म देगा।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!