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जब विलास में वासना की आस में बैठे 6 व्यापारी नही हो पाए तृप्त

जब विलास में वासना की आस में बैठे 6 व्यापारी नही हो पाए तृप्त

एक रात की बात…और शहडोल

एक रात की बात है जब शहर के चंद व्यापारी शराबी फिल्म के गाने की तर्ज पर रात गुलजार करने निकल गए फिर क्या गाना खत्म होते यानी पटकथा में पुलिस वाले भाई साहब की एंट्री हो जाती है और तेल मसाज के इस खेल में खलल पैदा हो गया ये स्क्रिप्ट ठीक उसी तरह है जैसे फ़िल्म में कोई विलेन हीरोइन को अगवा कर लेता है और फिर हीरो की एंट्री हो जाती है…. कहते हैं विलास के उस लोक में इन 6 व्यापारियों के लिए रम्भा,मेनका,और अन्य अप्सराओँ को बुलाया गया इस शर्त पर की ये अप्सराएं अलग-अलग लोगों को अपने प्रदर्शन से खुश करेंगी सब कुछ तय हो चुका था वासना की आग में जलते इन व्यापारियों के कमरों की कुंडी खटकते ही अप्सराओँ का आगमन हुआ सभी बेलिबास हो चुके थे किंतु वासना के इस तपन में इंद्र देव स्वयं दंडाधिकारी के रूप में पहुच गए और निर्वस्त्र हुए इन व्यापारियों को अर्थदण्ड दे बैठे फिर क्या अंत मे आनन फानन में इन रहीसजादों ने दौलत इजात किया और दौलत के सौदे में इंद्रदेव भला कहा न करते वासना के इस ठगी में किसी को एप्पल चखने को मिला तो किसी को स्वर्ग लोग बनाने के लिए जमीन और कमरा…ध्यान दीजिए स्क्रिप्ट एक हैं पर किस्से अलग-अलग हैं… और हाँ इत्मिनान रखिए बहुत जल्द हम इन बेलिबास लोगों के नाम भी बताएंगे अलग-अलग स्क्रिप्ट और कहानी भी.. तब तक चाव से पढ़िए वासना के इन पुजारियों को..

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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