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सरकार का स्पष्ट बयान: APSRTC का निजीकरण नहीं होगा, ई-बस के तहत निजी फर्मों को संपत्ति हस्तांतरित नहीं की जाएगी

No privatisation of APSRTC, e-buses won’t transfer assets to private firms: government

विशेष मुख्य सचिव (परिवहन) कृष्ण बाबू ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत के दौरान APSRTC (आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम) की किसी भी संपत्ति या सेवा का निजी फर्मों को हस्तांतरण नहीं किया जाएगा। यह साफतौर पर संकेत देता है कि राज्य सरकार का निजीकरण की कोई योजना नहीं है और यह योजना केवल हरित वाहन परिवर्तन की दिशा में एक कदम है।

कृष्ण बाबू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया जा रहा है, लेकिन इसमें RTC के संसाधनों या संचालन को निजी हाथों में देने की कोई बात नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को और अधिक पर्यावरण के अनुकूल बनाने का प्रयास है, जिससे प्रदूषण कम होगा और यात्री सुविधा बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि APSRTC के पास अपने वाहनों और सेवा प्रबंधन के पूर्ण नियंत्रण के साथ ही नई इलेक्ट्रिक बसों को संचालित किया जाएगा। निजी एजेंसियों को बसों के संचालन या किसी अन्य संचालन से जुड़ी संपत्ति का अधिकार नहीं दिया जाएगा। इस घोषणा से उन चिंताओं को भी दूर किया गया है जिनमें कहा जा रहा था कि ई-बस योजना के तहत राज्य के सार्वजनिक परिवहन के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

अधिकारियों ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्ध है, इसीलिए पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया गया है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पारंपरिक डीजल बसों से निकलने वाले हानिकारक उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

इसके अलावा, कृष्ण बाबू ने यात्रियों को आश्वासन दिया कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में कटौती नहीं की जाएगी और यात्रियों को बेहतर सेवा का अनुभव मिलेगा। वे सरकार की ओर से जारी किए गए नीतियों और निर्देशों का पालन करते हुए इस योजना को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने प्रधानमंत्री शहरी सड़क वाहन योजना पर विशेष ध्यान देते हुए घरेलू और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया है, लेकिन राज्य सार्वजनिक परिवहन निगमों के स्वामित्व और नियंत्रण को बनाए रखा जाएगा।

इस घोषणा से यह स्पष्ट हो गया है कि पीएम ई-बस सेवा योजना का मकसद केवल सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है, न कि निजी एजेंसियों को राज्य के प्रमुख परिवहन संसाधनों पर नियंत्रण देना।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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