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विनय राजकुमार इंटरव्यू: ‘ग्रामायण’ के पीछे लंबे सफर की कहानी

Vinay Rajkumar interview: On the long journey behind ‘Graamaayana’

कन्नड़ सिनेमा के युवा कलाकार विनय राजकुमार की नई फिल्म ‘ग्रामायण’, जो ग्रामीण जीवन की सच्चाइयों को दर्शाती है, इस समय थिएटर्स में दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। यह फिल्म कई चुनौतियों और संघर्षों से गुजरते हुए बनी है, जिनमें वित्तीय परेशानियां और निर्माता के निधन जैसी बड़ी बाधाएं शामिल हैं।

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्म उद्योग ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, और ‘ग्रामायण’ की कहानी भी इसी दौर की गवाही देती है। विनय राजकुमार ने इस परियोजना को शुरू किया था, जब महामारी ने पूरे देश को थामा हुआ था। निर्माता के असमय निधन ने इस फिल्म के निर्माण को लगभग रोक दिया था, लेकिन कलाकार और टीमें कठिनाइयों को पार कर आगे बढ़ीं।

विनय राजकुमार ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि फिल्म की शूटिंग के दौरान कई बार दृश्यों और बजट को लेकर फैसले चुनौतीपूर्ण रहे। लेकिन ग्रामीण परिवेश और वहां के जीवन को सजीव रूप में पर्दे पर लाने के उद्देश्य ने सभी को जोड़े रखा। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म की कहानी और पात्रों को इतनी सच्चाई और गहराई से प्रस्तुत करने का उनका प्रयास ही इस कामयाबी की कुंजी है।

‘ग्रामायण’ की कहानी ग्रामीण भारत के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं को दर्शाती है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह सीमित संसाधनों के बीच भी लोगों की आशाएं और जिंदादिली जीवन को एक नई दिशा देती हैं। निर्माता की मृत्यु के बाद भी टीम ने आत्मबल दिखाया और इस फिल्म को सफलतापूर्वक पूरा करवा लिया।

फिल्म आलोचकों ने भी ‘ग्रामायण’ की कहानी, निर्देशन और अभिनय की सराहना की है। वे मानते हैं कि यह फिल्म कन्नड़ सिनेमा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट साबित हुई है। जहां ग्रामीण कहानियां अक्सर अनदेखी रह जाती हैं, वहां इस फिल्म ने उन मुद्दों पर प्रकाश डाला जो आज भी आम जनता के लिए प्रासंगिक हैं।

विनय राजकुमार की इस पहल से यह संदेश भी मिलता है कि चुनौतियों के बावजूद सिनेमा की दुनिया में सच्ची कहानियों को जीवित रखना और प्रस्तुत करना संभव है। ‘ग्रामायण’ न केवल एक फिल्म है, बल्कि एक मिशन भी है जो ग्रामीण जीवन के मूल्य और संघर्षों को सामने लाता है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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