दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

भारत की समुद्री परमाणु क्षमता पर पाकिस्तान की बढ़ी चिंता, रिपोर्ट में दावा- ‘इस बढ़त का फिलहाल कोई जवाब नहीं’

नई दिल्ली, भारत

भारत की सामरिक और परमाणु क्षमता को लेकर प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश ने चुपचाप अपनी समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Sea-based Nuclear Deterrence) को मजबूत कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है जहां उसके पास समुद्र में परमाणु हथियार ले जाने और आवश्यकता पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता मौजूद है। वहीं पाकिस्तान के पास फिलहाल ऐसी कोई पनडुब्बी या सैन्य प्लेटफॉर्म नहीं है, जो इस स्तर की परमाणु क्षमता का मुकाबला कर सके।

‘मॉडर्न डिप्लोमेसी’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत की यह उपलब्धि उसकी दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपनी समुद्री परमाणु क्षमताओं को सार्वजनिक रूप से ज्यादा प्रचारित नहीं किया, बल्कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र में तैनात परमाणु हथियार किसी भी देश की विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Credible Nuclear Deterrence) को मजबूत बनाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की परमाणु रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी न्यूक्लियर ट्रायड (Nuclear Triad) है। इसका अर्थ है कि देश के पास परमाणु हथियारों को जमीन, हवा और समुद्र—तीनों माध्यमों से लॉन्च करने की क्षमता हो। किसी भी परमाणु शक्ति संपन्न देश के लिए यह रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे किसी भी संभावित हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनी रहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र में तैनात परमाणु हथियारों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी गोपनीयता होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने पनडुब्बी अभियानों और उनकी तैनाती से जुड़ी जानकारियों को जानबूझकर गोपनीय रखा है। यदि किसी परमाणु हथियार ले जाने वाली पनडुब्बी की सटीक लोकेशन, हथियारों की क्षमता या परिचालन स्थिति विरोधी देश को पता नहीं होती, तो संघर्ष की स्थिति में उसे पहले हमले में निशाना बनाना बेहद कठिन हो जाता है। यही कारण है कि समुद्री परमाणु क्षमता को किसी भी देश की सुरक्षा रणनीति का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान के पास फिलहाल ऐसी कोई परमाणु-सक्षम पनडुब्बी नहीं है, जो भारत की इस क्षमता का प्रभावी मुकाबला कर सके। इसके अलावा पाकिस्तान के पास निकट भविष्य में ऐसी पनडुब्बी हासिल करने की कोई स्पष्ट समय-सीमा या आधिकारिक योजना भी सामने नहीं आई है। ऐसे में समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के क्षेत्र में भारत को महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त हासिल है।

हालांकि, रक्षा और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन केवल सैन्य क्षमता का विषय नहीं है, बल्कि कूटनीतिक संवाद, विश्वास निर्माण और जिम्मेदार परमाणु नीति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से ‘नो फर्स्ट यूज़’ (No First Use) की घोषित परमाणु नीति का पालन करने की बात करता रहा है, जिसके तहत परमाणु हथियारों का पहला उपयोग न करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।

विश्लेषकों का कहना है कि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता किसी भी देश की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाती है, क्योंकि यह संभावित विरोधी को किसी भी प्रथम हमले के गंभीर परिणामों का संदेश देती है। इसी कारण विश्व की प्रमुख परमाणु शक्तियां अपनी नौसेना के माध्यम से भी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता विकसित करती रही हैं।

फिलहाल, ‘मॉडर्न डिप्लोमेसी’ की इस रिपोर्ट पर भारत सरकार या पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, रिपोर्ट ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन, समुद्री सुरक्षा और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!