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ईरान में 23 साल की मर्जिया नीरी को फांसी, यौन हमले से बचने के लिए हत्या का किया था दावा; आत्मरक्षा की दलील कोर्ट ने ठुकराई

तेहरान, ईरान

ईरान में 23 वर्षीय महिला मर्जिया नीरी को हत्या के मामले में फांसी दिए जाने के बाद देश की न्याय व्यवस्था और महिलाओं की कानूनी सुरक्षा पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मर्जिया ने अदालत में दावा किया था कि जिस व्यक्ति की मौत हुई, उसने उन पर यौन हमला करने की कोशिश की थी। मर्जिया का कहना था कि उन्होंने अपनी जान और सम्मान बचाने के लिए आत्मरक्षा में उसका विरोध किया था।

रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने उनके आत्मरक्षा के दावे को स्वीकार नहीं किया और उन्हें हत्या का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। बाद में ईरानी अधिकारियों ने सजा पर अमल किया।

घटना को लेकर क्या दावा किया गया?

स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मर्जिया ने सुनवाई के दौरान कहा था कि घटना के समय वह यौन हमले के खतरे में थीं। उनका दावा था कि उन्होंने खुद को बचाने के लिए हमलावर का विरोध किया और चाकू का इस्तेमाल किया।

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, इस घटना में संबंधित व्यक्ति की मौत हो गई। मामले में मर्जिया के पति की मौत का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, अदालत ने इस घटनाक्रम को आत्मरक्षा की कार्रवाई के तौर पर स्वीकार नहीं किया।

अदालत के फैसले के अनुसार, मर्जिया हत्या की दोषी थीं और इसी आधार पर उन्हें मौत की सजा दी गई। यही फैसला अब मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का विषय बना हुआ है।

कोर्ट ने आत्मरक्षा की दलील क्यों नहीं मानी?

मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात मर्जिया का आत्मरक्षा का दावा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, उन्होंने अदालत के सामने यह पक्ष रखा था कि उनकी कार्रवाई का उद्देश्य हमलावर से खुद को बचाना था।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यौन हमले या उसके प्रयास से जुड़े मामलों में महिला के सामने मौजूद खतरे की गंभीरता और घटना के दौरान उसकी प्रतिक्रिया का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि आत्मरक्षा में उठाया गया कदम और पूर्व नियोजित हत्या एक जैसी परिस्थितियां नहीं होतीं।

हालांकि, मर्जिया के मामले में अदालत ने उनके बचाव को पर्याप्त नहीं माना और हत्या के आरोप को आधार बनाया। इसके बाद मौत की सजा को लागू किया गया।

महिलाओं के अधिकारों पर फिर उठे सवाल

मर्जिया नीरी की फांसी ने ईरान में महिलाओं के अधिकारों और कानूनी संरक्षण को लेकर चल रही बहस को फिर तेज कर दिया है। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यौन हिंसा के खतरे में महिलाओं को प्रभावी कानूनी संरक्षण मिलना जरूरी है।

मानवाधिकार संगठनों का यह भी कहना है कि ऐसे मामलों में जांच और सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। खासकर तब, जब आरोपी महिला खुद यह दावा कर रही हो कि उसने यौन हमले से बचने के लिए कार्रवाई की।

मर्जिया के मामले में अदालत ने हालांकि इस दलील को स्वीकार नहीं किया। इस कारण उनकी फांसी को लेकर मानवाधिकार समूहों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।

ईरान की मृत्युदंड व्यवस्था भी चर्चा में

ईरान में मौत की सजा का इस्तेमाल लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर रहा है। संगठनों का कहना है कि मृत्युदंड अपरिवर्तनीय सजा है और इसलिए इसे देने से पहले न्यायिक प्रक्रिया में अत्यधिक सावधानी, पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है।

मर्जिया नीरी का मामला इसी व्यापक बहस में सामने आया है। उनके मामले में एक तरफ अदालत का हत्या का फैसला है, जबकि दूसरी तरफ मानवाधिकार संगठनों के अनुसार महिला ने यौन हमले के प्रयास और आत्मरक्षा की बात कही थी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

मर्जिया नीरी की फांसी के बाद यह सवाल फिर उठ रहा है कि यौन हिंसा से बचने के दौरान किसी महिला द्वारा की गई कार्रवाई को कानून किस सीमा तक आत्मरक्षा मानता है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में महिला की परिस्थितियों, खतरे की प्रकृति और उपलब्ध सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए।

मर्जिया की फांसी ने ईरान में महिलाओं की सुरक्षा, आत्मरक्षा के कानूनी अधिकार और मृत्युदंड के इस्तेमाल को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी तथ्यों और अदालत के विस्तृत रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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