दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

सुप्रीम कोर्ट ने बीएसएफ जवान के खिलाफ दहेज हत्या का केस किया रद्द, कहा- कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने बीएसएफ के एक कर्मचारी को बड़ी राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज दहेज हत्या के मामले की एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड को देखते हुए आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कर्मचारी की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने इससे पहले आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने से इनकार कर दिया था।

2016 में मेरठ में दर्ज हुआ था मामला

यह मामला वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में दर्ज किया गया था। मामले में बीएसएफ कर्मचारी के खिलाफ दहेज हत्या से जुड़े आरोप लगाए गए थे। आरोपी ने आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से पेश रिकॉर्ड में उसकी ड्यूटी से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी सामने रखा गया। अदालत ने बीएसएफ बटालियन के कमांडेंट की ओर से जारी प्रमाण पत्र पर विशेष रूप से गौर किया।

घटना के समय मेरठ से बाहर था आरोपी

कमांडेंट के प्रमाण पत्र में कहा गया था कि जिस अवधि में घटना हुई, उस दौरान अपीलकर्ता आधिकारिक ड्यूटी पर था और सरकारी कार्य के लिए मेरठ से बाहर तैनात था।

पीठ ने इस दस्तावेज सहित मामले में उपलब्ध अन्य तथ्यों पर विचार किया। अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि आरोपी के माता-पिता को मामले में पहले ही बरी किया जा चुका है।

सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े कमरे और दरवाजे की स्थिति को लेकर भी अभियोजन पक्ष से सवाल किए गए। अदालत ने मामले के समग्र तथ्यों को देखते हुए आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं माना।

हाई कोर्ट का आदेश हुआ रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने बीएसएफ कर्मचारी की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही भी समाप्त कर दी गई।

शीर्ष अदालत के इस फैसले से आरोपी को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!