दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

भारत में चीनी के दाम 20% तक बढ़े, उत्पादन में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है भारत; पाकिस्तान काफी पीछे

नई दिल्ली, दिल्ली

भारत में अगस्त के दौरान चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई है। कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के बाद आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है, हालांकि चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। उत्पादन और खपत के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024-25 में घरेलू खपत उत्पादन से अधिक रही है।

281 लाख टन खपत, 261 लाख टन उत्पादन

वर्ष 2024-25 में भारत में चीनी की घरेलू खपत करीब 281 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि कुल उत्पादन लगभग 261 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया। यानी इस अवधि में खपत उत्पादन से करीब 20 लाख मीट्रिक टन अधिक रही।

इसके बावजूद चीनी उद्योग का मानना है कि देश में चीनी की किल्लत जैसी कोई स्थिति नहीं है। बाजार में उपलब्ध स्टॉक और आपूर्ति व्यवस्था के कारण घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।

2018-19 से 2023-24 तक उत्पादन रहा ज्यादा

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 से लेकर 2023-24 तक भारत में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत से अधिक रहा था। हालांकि वर्ष 2024-25 में यह स्थिति बदल गई। उत्पादन घटकर 261 लाख मीट्रिक टन रह गया, जबकि खपत बढ़कर 281 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई।

इस बदलाव ने चीनी की उपलब्धता और भविष्य की कीमतों को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन उद्योग फिलहाल कमी की संभावना से इनकार कर रहा है।

चीनी उत्पादन में भारत की मजबूत स्थिति

भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर ब्राजील और भारत चीनी उत्पादन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। भारत की विशाल गन्ना खेती, बड़ी संख्या में चीनी मिलें और मजबूत घरेलू बाजार इसे वैश्विक चीनी उद्योग में महत्वपूर्ण स्थान दिलाते हैं।

पड़ोसी देश पाकिस्तान भी गन्ना और चीनी उत्पादन करता है, लेकिन कुल उत्पादन के मामले में वह भारत से काफी पीछे है। भारत का उत्पादन स्तर पाकिस्तान की तुलना में कई गुना अधिक है।

इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से बदली तस्वीर

देश में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलने के बाद गन्ने का उपयोग केवल चीनी तक सीमित नहीं रहा है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के कारण गन्ना आधारित इथेनॉल की मांग बढ़ी है। इससे चीनी उद्योग को खाद्य जरूरतों और इथेनॉल उत्पादन के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

फिलहाल चीनी उद्योग ने साफ कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। हालांकि अगस्त में कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक आई तेजी ने बाजार और उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान जरूर खींचा है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!