दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

सऊदी प्रिंस ने ट्रंप से मांगी हूतियों पर एयरस्ट्राइक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने दो बार की अपील ठुकराई

रियाद, सऊदी अरब

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की तेजी से बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के आग्रह को ठुकरा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को ट्रंप को दो बार फोन किया और हूतियों के खिलाफ अमेरिकी हमले की मांग की, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिलहाल सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की मौजूदा रणनीति यमन में नया सैन्य मोर्चा खोलने की नहीं है। अमेरिका अपनी सैन्य प्राथमिकताओं को ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर केंद्रित रखना चाहता है। वाशिंगटन का मानना है कि हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरने से पश्चिम एशिया में संघर्ष और फैल सकता है।

हूतियों की हालिया बढ़त ने सऊदी अरब की चिंता को और गंभीर बना दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने यमन के तट के पास स्थित रणनीतिक पेरिम द्वीप, जिसे मयून भी कहा जाता है, और धुबाब इलाके पर कब्जा कर लिया है। ये क्षेत्र बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के नजदीक हैं। यह जलमार्ग लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम है।

हूतियों के इस विस्तार का असर तेल कारोबार पर भी पड़ सकता है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के कारण लाल सागर के समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सऊदी अरब के लिए यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच लाल सागर मार्ग उसके तेल निर्यात के लिए और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ा रहा है, लेकिन प्रत्यक्ष हवाई हमलों से बच रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने सऊदी अधिकारियों के साथ स्थिति पर चर्चा की है।

सऊदी अरब अब लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हूती विद्रोहियों की बढ़त के जवाब में रियाद क्या कदम उठाता है और अमेरिका किस हद तक उसका समर्थन करता है।

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!