दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

PERM सस्पेंशन का सीधा असर H1B वीजा पर नहीं होगा, US में 8 कंपनियों पर ग्रीन कार्ड एक्शन पर एक्सपर्ट की राय

PERM सस्पेंशन का सीधा असर H1B वीजा पर नहीं होगा, US में 8 कंपनियों पर ग्रीन कार्ड एक्शन पर एक्सपर्ट की राय

अमेरिकी सरकार ने PERM (परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम) से आठ बड़ी कंपनियों को सस्पेंड कर दिया है, जिसमें कई नामी भारतीय IT कंपनियां शामिल हैं। इस फैसले का मुख्य कारण प्रोग्राम में धोखाधड़ी के आरोप माने गए हैं। कंपनियों में कॉग्निजेंट, इंफोसिस, TCS, विप्रो, HCL टेक्नोलॉजीज और कैपजेमिनी के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट और एडोब भी शामिल हैं।

PERM सस्पेंशन का असर

लेबर सेक्रेटरी कीथ सोंडरलिंग ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि इन कंपनियों ने अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी वर्कर्स को नौकरी दी। PERM सस्पेंशन से जुड़े इस कदम का सीधा असर मौजूदा H-1B वीजा धारकों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन भविष्य में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

यूनिवर्सिटी लिविंग के फाउंडर और CEO सौरभ अरोड़ा के अनुसार, PERM सस्पेंशन से अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की राह कठिन हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो इस प्रक्रिया में पहले से लगे हुए हैं। कोर्टीन्युटी में बाधा आ सकती है और नौकरी बदलने या परिवार के साथ रहने की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

भारतीय स्टूडेंट्स और वर्कर्स पर प्रभाव

इस फैसले के चलते भारतीय छात्र और कामगार अमेरिका की बजाय अन्य देशों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। 2024-25 के दौरान US में 3.63 लाख से ज्यादा भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं और वे बेहतर करियर विकल्पों की तलाश में हैं। हालांकि PERM सस्पेंशन स्टूडेंट वीजा या OPT पर सीधा असर नहीं डालेगा, यह उनके करियर की योजना में संशय उत्पन्न कर सकता है।

सौरभ अरोड़ा का मानना है कि छात्र और परिवार अब सिर्फ अमेरिका के बजाय जर्मनी, आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों को भी गंभीरता से देखेंगे। ये देश पढ़ाई की लागत, नौकरी के अवसर और लंबे समय तक रहने के विकल्प की वजह से आकर्षक हो सकते हैं।

अमेरिका में H-1B वीजा के लिए 2024 में लगभग 71% आवेदक भारत से थे, जो भारतीय प्रतिभा की मजबूत उपस्थिति दर्शाता है। PERM सस्पेंशन के बाद यह संख्या प्रभावित हो सकती है, जिससे कई भारतीय पेशेवर वैश्विक स्तर पर विकल्प तलाश सकते हैं।

विदेश शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी यूनिवर्सिटीज़ और उनके रिसर्च अवसर विदेशी छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे, परंतु चयन प्रक्रिया में अब अधिक विवेचना और तुलना होगी। छात्रों को अपने विकल्पों का विस्तार करना और हर देश के वीजा नियमों तथा करियर संभावनाओं को समझना जरूरी होगा।

अंततः, PERM सस्पेंशन अस्थायी रूप से भारतीय प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के अमेरिका में बेस बनने के सपने को प्रभावित कर सकता है, मगर यह मौजूदा H-1B वीजा धारकों के लिए चुनौती नहीं है। प्रभावित लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपने एप्लिकेशन की स्थिति समझें और इमिग्रेशन विशेषज्ञों से सलाह लें।

Source

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!