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राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन तेज किया

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन तेज किया

नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने मजबूत आंदोलन तेज कर दिया है। विपक्ष के 10 सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की और वोट चोरी के सबूत सौंपे। इसके बाद नेता विपक्ष राहुल गांधी ने संसद में कहा कि राष्ट्रपति ने सबूत मांगने से इनकार नहीं किया।

राष्ट्रपति से मुलाकात और विपक्ष की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति के समक्ष इस मुद्दे को रखा था। राष्ट्रपति ने कहा कि सबूत दिखाएं। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि सबूत देने की पूरी तैयारी है। विपक्ष जल्द ही सुप्रीम कोर्ट भी जाएगा। उन्होंने बताया कि देशवासियों और मीडिया से डर अब कम हो गया है और आंदोलन तेज होगा।

कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने कहा कि राष्ट्रपति के इस रुख ने विपक्षी दलों को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने वोट की चोरी के आरोप को गंभीरता से लिया है और सबूत प्रस्तुत करने की मांग की है। 12 तारीख को विपक्ष का एक प्रतिनिधिमंडल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेगा।

सड़क, संसद और सुप्रीम कोर्ट में जारी रहेगा संघर्ष

विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में तब तक रुकेंगे नहीं जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि यह कदम राहुल गांधी के सत्याग्रह का हिस्सा है, जिसमें देश के सबसे उच्च संवैधानिक पद तक जाकर याचिका दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक अहम कदम है ताकि कोई यह कह न सके कि विपक्ष ने राष्ट्रपति से नहीं संपर्क किया।

पवन खेड़ा ने मेट्रो स्टेशन बंद करने के फैसले पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि डर ज्यादा समय तक नहीं टिकता और देश के नागरिकों तथा मीडिया का मन डर से मुक्त हो चुका है। विपक्ष इस अभियान को और तेज करेगा।

राहुल गांधी ने इस आंदोलन को देश की न्यायप्रियता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि वोट चोरी की बात को गंभीरता से लेना जरूरी है और उन्होंने इसे दबाने का प्रयास विफल साबित होगा। विपक्ष ने वादा किया है कि वे सड़क से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

विपक्षी दल इस पूरे मामले को लोकतंत्र की रक्षा के अभियान के तौर पर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि वोट का अधिकार देश के हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है। विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेंगे जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते।

इस बीच विपक्ष की साझा रणनीति यह है कि वे वोट चोरी के खिलाफ सभी संवैधानिक रास्तों का उपयोग करेंगे। यह आंदोलन धीरे-धीरे कानूनी और सामाजिक स्तरों पर फैल रहा है। विपक्ष के नेतागण जनता को भी इस मुद्दे पर जागरूक कर रहे हैं ताकि व्यापक समर्थन मिल सके।

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